Tuesday, August 4, 2026
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पहली पुण्यतिथि पर याद किए गए शिबू सोरेन, सीएम हेमंत ने पैतृक गांव में किया 14 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण

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रांची, 4 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड आंदोलन के महानायक और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर मंगलवार को रामगढ़ जिला स्थित उनके पैतृक गांव नेमरा में हजारों लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 14 फीट ऊंची आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भावुक हो गए। समारोह के दौरान सीएम ने 102.5 करोड़ रुपये की लागत वाली विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दिन सिर्फ उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति का दिन है।

उन्होंने कहा कि इसी दिन दिशोम गुरु ने अंतिम सांस ली थी और उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन ने अपना पूरा जीवन जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया। उनकी स्मृतियां और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।

उन्होंने कहा कि नेमरा में स्थापित की गई 14 फीट ऊंची प्रतिमा नई पीढ़ी को अपने इतिहास और संघर्षों से जोड़ने का माध्यम बनेगी। आज के युवाओं को यह जानना चाहिए कि आजादी के बाद भी इस क्षेत्र के लोगों ने किस तरह शोषण सहा और उनके पूर्वजों ने उसके खिलाफ लंबा संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि इतिहास को याद रखकर ही समाज बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकता है।

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री उस समय भावुक हो गए, जब उन्होंने समारोह स्थल के समीप स्थित अपने दादा सोबरन मांझी की समाधि का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके दादा की हत्या असामाजिक तत्वों ने कर दी थी। उस समय उनका जन्म भी नहीं हुआ था, लेकिन आज भी समाज में वैसी ताकतें मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी चुनौतियों का जवाब केवल आपसी एकता, भाईचारा और एक-दूसरे के सम्मान में निहित है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन झारखंड की ताकत उसकी एकजुटता है। उन्होंने कहा कि आज राज्य के विभिन्न हिस्सों में हजारों लोग दिशोम गुरु को श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्र हुए हैं, जो उनके प्रति जनता के अटूट सम्मान और विश्वास का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु और झारखंड आंदोलन के अन्य वीर सपूतों के संघर्ष की बदौलत अलग झारखंड राज्य का सपना साकार हुआ। अब इस राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने की जिम्मेदारी हम सभी की है।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे और विकास की प्रक्रिया में सभी की भागीदारी सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री ने झारखंड आंदोलन के सभी शहीदों को नमन करते हुए कहा कि उनके संघर्षों से प्रेरणा लेकर ही राज्य का भविष्य मजबूत बनाया जा सकता है।