नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। तेलंगाना रक्षा सेना (टीआरएस) की अध्यक्ष के. कविता ने बीसी आरक्षण बिल (पिछड़ा वर्ग आरक्षण विधेयक) का जिक्र करते हुए कहा कि अगर अगले बजट सत्र में बीसी आरक्षण बिल पास नहीं किया जाता है तो हमारे कार्यकर्ता दिल्ली कूच करेंगे।
के. कविता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि अगर हम सड़कों पर उतर आए तो दिल्ली ठप हो जाएगी। उन्होंने कांग्रेस और भाजपा को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि अगले बजट सत्र तक बीसी आरक्षण बिल पास करें, वरना टीआरएस के हजारों कार्यकर्ता दिल्ली तक मार्च करेंगे। जैसा कि जेन-जी ने साबित कर दिया है, जबरदस्ती थोपी जाने वाली राजनीति अब नहीं चलेगी।
एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज का यह जमावड़ा कोई आम जमावड़ा नहीं है। यह एक ऐसा जमावड़ा है जो हमारे जीवन में बदलाव लाएगा। अगर कोई देश आगे बढ़ना चाहता है तो उसे तीन चीजों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। पहली चीज है शिक्षा। दूसरी चीज है आर्थिक सशक्तिकरण और तीसरी चीज है राजनीतिक सशक्तिकरण। शिक्षा से जागरूकता आएगी। आर्थिक सशक्तिकरण से आत्म-सम्मान बढ़ेगा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से न्याय मिलेगा।
मेरी दिली इच्छा है कि मुस्लिम महिलाओं की आवाज विधानसभाओं में गूंजे और वे कानून बनाने वाली बनें। हम यह नहीं चुनते कि हम कहां पैदा हों, लेकिन हम यह जरूर चुनते हैं कि हम किसके लिए लड़ें। मैं उन सभी समुदायों के लिए अपना जीवन समर्पित करने का संकल्प लेती हूं जो बर्बाद हो चुके हैं, दशकों से नजरअंदाज किए गए हैं और हमारे राजनीतिक संस्थानों में जिन्हें व्यवस्थित रूप से उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक सभी को पूर्ण सामाजिक न्याय नहीं मिल जाता।
उन्होंने बताया कि तेलंगाना में ‘सामाजिक न्याय संकल्प सभा’ में हजारों लोग एकजुट हुए और इन अहम संकल्पों को पूरा करने का वादा किया है। टीआरएस समान विचारधारा वाले सहयोगियों के साथ मिलकर तब तक देशव्यापी आंदोलन चलाएगी, जब तक कि विधायी निकायों में पिछड़े वर्गों (बीसी) के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित नहीं हो जाता।
इसके साथ ही महात्मा ज्योतिराव फुले और उनकी पत्नी को ‘भारत रत्न’ पुरस्कार दिया जाना चाहिए। केंद्र और राज्य सरकारों में एससी-एसटी के लिए आरक्षित बैकलॉग रिक्तियों को भरने के लिए एक विशेष अधिसूचना जारी की जानी चाहिए। आदिवासियों को वन भूमि पर पूर्ण अधिकार दिए जाने चाहिए। परिसीमन प्रक्रिया से स्वतंत्र, विधायी निकायों में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू किया जाना चाहिए। मुसलमानों के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के उपाय किए जाने चाहिए और एक व्यापक वक्फ बोर्ड अधिनियम बनाया जाना चाहिए। सिख और ईसाई समुदायों के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के कदम उठाए जाने चाहिए। ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को पूर्ण अधिकार दिए जाने चाहिए। दिव्यांग व्यक्तियों की पेंशन में वादे के अनुसार वृद्धि की जानी चाहिए और सह-चयनित सदस्यों के बीच उनके लिए आरक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए।

