गांधीनगर, 7 अगस्त (आईएएनएस)। गुजरात सरकार ने पिछले चार वित्तीय वर्षों में सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित 14,925 से अधिक मरीजों को 14.57 करोड़ रुपए से ज्यादा की मुफ्त चिकित्सा सहायता प्रदान की है। राज्य सरकार विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों में इस आनुवंशिक रक्त रोग की जल्द पहचान, उपचार और दीर्घकालिक देखभाल को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
जनजाति विकास विभाग के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2026-27 के दौरान राज्य की ‘निःशुल्क चिकित्सा सहायता योजना’ के तहत यह आर्थिक सहायता दी गई है।
इस सहायता का उद्देश्य मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना और इस दीर्घकालिक बीमारी के उपचार से जुड़े आर्थिक बोझ को कम करना है।
सरकार ने कहा कि वित्तीय सहायता के अलावा सिकल सेल एनीमिया पर नियंत्रण और मरीजों के स्वास्थ्य में सुधार के लिए व्यापक स्वास्थ्य रणनीति भी अपनाई गई है।
आदिवासी क्षेत्रों में बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे बीमारी की समय पर पहचान हो सके। जिन मरीजों में सिकल सेल एनीमिया की पुष्टि हो जाती है, उन्हें नियमित दवाएं, निरंतर निगरानी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह उपलब्ध कराई जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में आशा कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्यकर्मियों और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों का उद्देश्य लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक करना और समय पर जांच व उपचार के लिए प्रेरित करना है।
जिन मरीजों को उन्नत चिकित्सा उपचार की आवश्यकता होती है, उनके लिए रेफरल प्रणाली और उच्च स्तरीय उपचार सुविधाओं को भी मजबूत किया गया है, ताकि उन्हें समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
सरकार ने बताया कि यह पहल केंद्र सरकार के राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के साथ समन्वय में संचालित की जा रही है।
विभाग ने कहा, “राज्य सरकार आदिवासी समुदाय के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सिकल सेल एनीमिया की रोकथाम और उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग और जनजाति विकास विभाग के संयुक्त प्रयासों को आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत तथा विस्तारित किया जाएगा।”
गौरतलब है कि गुजरात में सिकल सेल एनीमिया का प्रभाव विशेष रूप से आदिवासी आबादी पर अधिक देखा जाता है। इसी कारण स्क्रीनिंग, समय पर पहचान और निरंतर उपचार राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति के प्रमुख हिस्से बने हुए हैं, ताकि बीमारी से होने वाली जटिलताओं को कम किया जा सके।

