आरा, 10 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार के बहुचर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में आरा की अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए तत्कालीन एसडीएम और एसडीपीओ समेत 11 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मियों के खिलाफ गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं। भोजपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर 12 अगस्त तक न्यायालय में पेश करने का निर्देश दिया है। हालांकि, भोजपुर पुलिस ने इस कार्रवाई की जानकारी होने से इनकार किया है।
अदालत की यह कार्रवाई शाहपुर थाना कांड संख्या 178/2026 से जुड़ी बताई जा रही है। इस मामले में अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 73 के तहत गैर-जमानती वारंट जारी करने सहित जांच की प्रगति से संबंधित कई बिंदुओं पर अदालत से निर्देश देने की मांग की थी। जिन अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ वारंट जारी होने की बात कही जा रही है, उनमें जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीएम संजीत कुमार, तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार, दारोगा अंकित आर्यन, हरिचंद्र कुमार, एएसआई रामाशंकर यादव, एसटीएफ के विकास कुमार, अक्षय कुमार और अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं।
एसटीएफ जवान अक्षय कुमार को इस मामले में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह के मुताबिक, अदालत के समक्ष जांच की स्थिति और अब तक की पुलिस कार्रवाई से जुड़े कई सवाल उठाए गए थे। इनमें जांच शुरू होने की तारीख, अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए उठाए गए कदम, आरोपियों को जारी नोटिसों का विवरण और जिन आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, उसके कारणों की जानकारी मांगी गई थी। याचिका में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का पूरा विवरण भी मांगा गया है। इसमें मृतक भरत भूषण तिवारी के मोबाइल फोन से संबंधित जानकारी, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और जांच के दौरान दर्ज किए गए गवाहों के बयान शामिल हैं।
अधिवक्ता का दावा है कि भरत तिवारी के मोबाइल में कथित तौर पर महत्वपूर्ण साक्ष्य मौजूद थे और पुलिस द्वारा मोबाइल अपने कब्जे में लिए जाने के बाद उसके संबंध में भी जानकारी मांगी गई है। अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष यह भी सवाल उठाया कि क्या किसी आरोपी ने जानबूझकर गिरफ्तारी से बचने का प्रयास किया है, क्या किसी को फरार घोषित किया गया है और मामले की जांच फिलहाल किस स्थिति में है। गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के कई मामलों का हवाला दिए जाने की बात भी कही गई है।
अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने दावा किया कि अदालत ने उनकी सभी प्रमुख प्रार्थनाओं को स्वीकार कर लिया है और पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि 12 अगस्त तक आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समय तक गिरफ्तारी नहीं होती है तो एसपी को स्वयं 12 अगस्त को अदालत में उपस्थित होकर जवाब देना होगा। यह मामला 17 जून की सुबह शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुई पुलिस मुठभेड़ से जुड़ा है। बिलौटी निवासी काशीनाथ तिवारी के पुत्र भरत भूषण तिवारी को पुलिस कार्रवाई के दौरान पांच गोलियां लगने की बात सामने आई थी।
परिजनों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि भरत भूषण ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उसे गोली मारी गई। बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में भारी विरोध प्रदर्शन हुआ था। मामले को लेकर एक प्राथमिकी दर्ज की गई। बाद में मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए राज्य सरकार ने न्यायिक आयोग का गठन किया। आयोग को पूरे घटनाक्रम की जांच कर तथ्यों और परिस्थितियों की पड़ताल करनी है।

