नई दिल्ली, 10 अगस्त (आईएएनएस)। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को राज्यसभा में बताया कि 2014-15 के बाद से पारसी समुदाय में 534 बच्चों का जन्म हुआ है। सरकार ने ‘जियो पारसी’ योजना पर 37.43 करोड़ रुपए खर्च करके समुदाय की आबादी को स्थिर करने की कोशिशें तेज की हैं।
केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि 500 से ज्यादा बच्चों के जन्म से पारसी समुदाय में अपनी घटती आबादी को स्थिर करने की उम्मीद जगी है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्र थर्ड-पार्टी मूल्यांकन स्टडीज में भी इस स्कीम को अपने लक्ष्य को पूरा करने में सफल बताया गया है।
‘जियो पारसी’ स्कीम पर हुए खर्च की जानकारी देते हुए रिजिजू ने बताया कि 2025-26 में, समुदाय की सेहत से जुड़े हिस्से के तहत कुल 2.93 करोड़ रुपए, मेडिकल हिस्से के तहत 24 लाख रुपए और एडवोकेसी (जागरूकता अभियान) पर 29 लाख रुपए खर्च किए गए।
समुदाय की सेहत से जुड़े हिस्से पर खर्च की जाने वाली रकम पिछले कुछ सालों में लगातार बढ़ी है, जिसमें 2023-24 में 2.53 करोड़ रुपए और 2024-25 में 2.66 करोड़ रुपए शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि 2013 से मेडिकल हिस्से के तहत इनफर्टिलिटी (बांझपन) की समस्याओं के इलाज, बच्चे पैदा करने और बच्चे के जन्म के बाद की देखभाल के लिए आर्थिक मदद पाने वाले पारसी समुदाय के लोगों की कुल संख्या 582 है।
इसके अलावा, 2018-19 से स्कीम के ‘समुदाय की सेहत’ वाले हिस्से के तहत आर्थिक मदद पाने वाले लोगों की कुल संख्या 1,055 है। उन्होंने कहा कि पारसी समुदाय में जागरूकता और पहुंच बढ़ाने के लिए स्कीम का प्रचार-प्रसार नियमित रूप से किया जाता है।
रिजिजू ने बताया कि कई वर्कशॉप/बातचीत के सेशन, रजिस्ट्रेशन ड्राइव और बायो-ऑथेंटिकेशन ड्राइव भी आयोजित किए जाते हैं।
‘जियो पारसी’ स्कीम को लागू करने के बारे में जानकारी हर महीने प्रमुख पारसी अखबारों के जरिए भी दी जाती है। स्कीम के इस हिस्से के तहत, लाभार्थियों को कोई सीधी आर्थिक मदद नहीं दी जाती है।

