Tuesday, August 11, 2026
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विपक्ष के विरोध के बीच लोकसभा में केरल (नाम परिवर्तन) बिल पास, अब केरलम नाम से जाना जाएगा

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नई दिल्ली, 11 अगस्त (आईएएनएस)। लोकसभा में विपक्ष के सांसदों की लगातार नारेबाजी के बीच मंगलवार को ‘केरल (नाम परिवर्तन) बिल, 2026’ को ध्वनि मत से पास कर दिया गया। इस बिल में केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव है।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में यह बिल पेश किया, जबकि विपक्षी सांसद 20 जुलाई को नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी और बयान की मांग करते हुए नारेबाजी करते रहे।

सदन की अध्यक्षता कर रहे कृष्णा प्रसाद टेनेटी ने विपक्षी सांसदों से सदन को सुचारू रूप से चलने देने का आग्रह किया। हालांकि, हंगामा जारी रहा। नित्यानंद राय और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने केरल का नाम बदलने वाले बिल पर चर्चा न करने के लिए विपक्ष की आलोचना की।

रिजिजू ने कहा, “यह दुखद है कि केसी वेणुगोपाल जैसे वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी इस बिल पर नहीं बोलेंगे।” जब हंगामा नहीं थमा, तो बिना चर्चा के ही ध्वनि मत से बिल पास कर दिया गया।

इससे पहले इस साल फरवरी में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

गौरतलब है कि केरल विधानसभा ने 24 जून, 2024 को ‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव पास किया था। इस प्रस्‍ताव में कहा गया,”मलयालम भाषा में हमारे राज्य का नाम ‘केरलम’ है।”

पास प्रस्‍ताव में कहा गया था,”1 नवंबर 1956 को भाषा के आधार पर राज्यों का गठन किया गया था। 1 नवंबर को ‘केरल पिरवी दिवस’ भी मनाया जाता है। देश की आजादी की लड़ाई के समय से ही मलयालम भाषा बोलने वाले लोगों के लिए ‘संयुक्त केरल’ के गठन की जोरदार मांग रही है। हालांकि, संविधान की पहली अनुसूची में हमारे राज्य का नाम ‘केरल’ दर्ज है। केरल विधानसभा सर्वसम्मति से केंद्र सरकार से अपील करती है कि वह संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए तत्काल कदम उठाए।”

इसके बाद, केरल सरकार ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत ‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन करने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएं।