मुंबई, 11 अगस्त (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे ने झारखंड के रांची में पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे देवेंद्र नाथ महतो की प्रशंसा की। साथ ही उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) को तिलचट्टा की संज्ञा देते हुए निशाना साधा।
मुंबई में आईएएनएस से बातचीत में आनंद दुबे ने कहा कि देश को भलीभांति मालूम है कि तिलचट्टों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की आड़ में क्या किया था। पुलिस, मीडियाकर्मियों पर हमला कोई भूला नहीं है। वहीं, दूसरी ओर जब हम रांची में छात्रों के प्रदर्शन को देखते हैं तो वह शांतिपूर्ण है। देश को तिलचट्टे नहीं, तितलियां चाहिए। देश को छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो जैसे लोगों की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि चाहे रांची में विरोध प्रदर्शन हो या जंतर-मंतर पर, छात्रों की ओर से जो मुद्दे उठाए जा रहे हैं, वे जायज हैं। सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए और प्रदर्शनकारियों से बातचीत करनी चाहिए। जहां तक बात है कि सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके की तो वे किसका समर्थन करेंगे, क्या वे बहुत बड़े लोकतांत्रिक पद पर बैठे हैं, जिनके समर्थन से यह तय होगा कि कोई काम होगा या नहीं। वह एक आम कार्यकर्ता हैं और हम भी आम कार्यकर्ता हैं। जो सही है, वह सही है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की आड़ में क्या हुआ, कोई भूला नहीं है। भारत के टुकड़े-टुकड़े गैंग ने वहां पर कैसे नारे लगाए। मैं समझता हूं कि तिलचट्टे और तितली में अंतर होता है, देश को तिलचट्टे नहीं तितली चाहिए। रांची के विरोध प्रदर्शन में मीडियाकर्मियों को पीटा नहीं गया। पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की गई। किसी भी तरह की हिंसा छात्रों के द्वारा नहीं की गई है।
‘वंदे मातरम’ को लेकर आनंद दुबे ने कहा कि इससे जुड़ा बिल संसद के दोनों सदनों से पहले ही पास हो चुका है। अब एक नया कानून बन गया है जिसके तहत हम बिना किसी रोक-टोक के आजादी से ‘वंदे मातरम’ गा सकते हैं। हम तो इसे पहले से ही गाते आ रहे हैं। अगर स्वतंत्रता दिवस के दिन प्रधानमंत्री की अगुवाई में लाल किले से ‘वंदे मातरम’ गाया जाने वाला है, तो यह बहुत खुशी और गर्व की बात होगी।
संसद के मानसून सत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और नेता विपक्ष राहुल गांधी से अपील की है कि वे बाकी बचे हुए दिनों में सदन की कार्यवाही चलाएं। उन्होंने कहा कि संसद का सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ था और अब सत्र दो-तीन दिन में खत्म हो जाएगा। बार-बार सदन की कार्यवाही बाधित होने से लोगों के हितों से जुड़े मुद्दे नहीं उठे। कई सांसद ऐसे हैं, जो पहली बार राज्यसभा में आए हैं, और कई ऐसे हैं जिन्हें लोकसभा में बोलने का मौका नहीं मिला है। कई सांसदों की दिल की बात दिल में रह गई है। बचे हुए दिनों में गृह मंत्री और राहुल गांधी को सदन चलाना चाहिए, जिससे करोड़ों लोगों को फायदा हो सके।

