नई दिल्ली, 12 अगस्त (आईएएनएस)। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स’ का विमोचन कार्यक्रम विज्ञान भवन के सेंट्रल हॉल में आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री ने इस पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम में कई नेताओं ने हिस्सा लिया और पूर्व राष्ट्रपति के जीवन और संघर्षों की सराहना की।
कार्यक्रम में शामिल होने के बाद भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने आईएएनएस से कहा, “रामनाथ कोविंद भारत के राष्ट्रपति होने के साथ-साथ एक ऐसे व्यक्ति भी रहे हैं जो जमीन से जुड़े रहे और संघर्षों के रास्ते आगे बढ़े। जब उन्होंने अपनी आत्मकथा लिखी है, तो हम कह सकते हैं कि इस आत्मकथा में भारत की आत्मा दिखाई देगी क्योंकि उन्होंने जिन संघर्षों का सामना किया है।”
भाजपा सांसद महेश शर्मा ने कहा, “इस किताब में उनके जीवन के कुछ कम जाने-पहचाने पहलू मिलेंगे, जिससे पता चलता है कि वह कानपुर के एक छोटे से गांव के एक साधारण परिवार से आए और इतनी ऊंचाइयों तक पहुंचे। सादगी और विनम्रता के साथ, जिसका जिक्र उन्होंने खुद भी किया है और जिसका जिक्र प्रधानमंत्री ने भी किया।”
राज्यसभा के पूर्व सदस्य भगत सिंह कोश्यारी ने कहा, “रामनाथ कोविंद भारत के राष्ट्रपति रहे। उनके कार्यकाल के दौरान मैं राज्यपाल था लेकिन मेरा जुड़ाव उनसे इससे भी पहले का है। सबसे बड़ी बात यह है कि इतने ऊंचे पद पर पहुंचने के बाद भी रामनाथ कोविंद ने अपनी सादगी, शालीनता और विनम्रता नहीं छोड़ी और एक आम आदमी की तरह अपना जीवन जीते रहे।”
जैन धर्मगुरु आचार्य डॉ. लोकेश मुनि ने कहा, “देखिए, आज विज्ञान भवन के सेंट्रल हॉल में हमारे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का लोकार्पण हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने इस पुस्तक का विमोचन किया।”
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स’ का विमोचन किया। इस कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल समेत कई दिग्गज नेता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “आज हमें पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा के विमोचन का अवसर मिला है। मुझे खुशी है कि इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला है। रामनाथ कोविंद से बहुत लंबा परिचय रहा है। उन्हें करीब से जानने का भी अवसर मिला है। राष्ट्रपति के रूप में उनके मार्गदर्शन के साथ-साथ उनका मेरे प्रति विशेष स्नेह और आत्मीयता, यह मेरी बहुत बड़ी पूंजी रही है।”

