Wednesday, August 12, 2026
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विपक्षी संसदों ने एयर इंडिया हादसे और एफसीआरए मुद्दे पर सरकार से मांगा जवाब

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नई दिल्ली, 12 अगस्त (आईएएनएस)। संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को विपक्षी दलों के सांसदों ने एयर इंडिया के पायलट के कथित डोप टेस्ट, अहमदाबाद विमान हादसे की जांच रिपोर्ट, एफसीआरए विधेयक, बिहार की कानून-व्यवस्था, राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के सांसदों ने अलग-अलग मामलों में सरकार से पारदर्शिता बरतने और संबंधित मुद्दों पर गंभीरता से कार्रवाई करने की मांग की।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने एयर इंडिया के पायलट के डोप टेस्ट से जुड़ी रिपोर्ट पर कहा कि उन्होंने रिपोर्ट न तो देखी है और न ही उसका अध्ययन किया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि यदि सामने आई जानकारी सही है तो मामला बेहद गंभीर है और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) को इसे पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ देखना चाहिए।

तिवारी ने अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किए जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि हादसे की जांच रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है और ऐसे संवेदनशील मामलों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि विमान हादसे की रिपोर्ट सार्वजनिक करने को लेकर निर्धारित प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं हुआ।

वहीं, कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने एक संसदीय समिति और संयुक्त संसदीय समिति (सीजेपी) के जरिए सरकार के इरादों के विभिन्न पहलुओं की जांच किए जाने की वकालत की। उन्होंने आरोप लगाया कि अल्पसंख्यक वर्ग को किसी न किसी रूप में परेशान करने का इरादा दिखाई देता है। भगत ने कहा कि जेपीसी में हर बिंदु की जांच होनी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि संविधान के अनुच्छेद 19 में दिए गए अधिकारों का उल्लंघन न हो।

कांग्रेस सांसद अमर सिंह ने एयर इंडिया घटना से अलग एक अन्य मुद्दे पर सरकार से गृह मंत्री के सदन में आकर जवाब देने की मांग की। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी की शुरुआत से मांग रही है कि गृह मंत्री संसद में यह स्पष्ट करें कि बल प्रयोग और पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया था। उन्होंने इस मामले में जवाबदेही तय किए जाने की जरूरत बताई।

एफसीआरए विधेयक को लेकर भी विपक्ष ने सरकार पर दबाव बनाया। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि पहले जारी किया गया एफसीआरए का संस्करण काफी कठोर था और उन्हें लगता है कि उसमें कानून के गलत इस्तेमाल की आशंका थी। उन्होंने कहा कि सिविल सोसाइटी की ओर से इसका काफी विरोध हुआ है और संबंधित संस्थाओं ने सरकार से भी संपर्क किया है। सरकार के लिए उचित कदम यही होगा कि विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा जाए, ताकि इसके प्रावधानों की विस्तृत समीक्षा हो सके।