Thursday, August 13, 2026
SGSU Advertisement
Home अंतर्राष्ट्रीय भाषण देना बंद करो, आपका दोहरापन द‍िखाई देता है, अंतरराष्ट्रीय कानून को...

भाषण देना बंद करो, आपका दोहरापन द‍िखाई देता है, अंतरराष्ट्रीय कानून को लेकर फ्रांस की बयानबाजी पर भड़के अराघची

0
7

नई द‍िल्‍ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। ईरान के व‍िदेश मंत्री सैयद अब्‍बास अराघची ने मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानून पर फ्रांस के भाषण की तीखी आलोचना की। अराघची ने गाजा में इजरायली सरकार की कार्रवाइयों और ईरान के खिलाफ हमले के लिए फ्रांस के समर्थन की ओर इशारा किया।

सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पोस्‍ट में ल‍िखा, ”फ्रांस जैसे देशों को दुनिया को ‘मानवाधिकारों’ और अंतरराष्ट्रीय कानून पर भाषण देना बंद कर देना चाहिए। उनका दोहरापन साफ दिखता है और शर्मनाक है। गाजा में इजराइल के नरसंहार और ईरान के खिलाफ उसकी आक्रामक कार्रवाई का समर्थन करके आपने जो भी नैतिक ऊंचाई होने का दावा किया था, उसे पूरी तरह खत्म कर दिया है।”

अराघची ने कहा कि गाजा में इजरायली शासन की कार्रवाई और ईरान के खिलाफ उसकी आक्रामकता का समर्थन करके फ्रांस खुली पाखंडपूर्ण नीति अपना रहा है।

ईरान की मेहर समाचार एजेंसी की र‍िपोर्ट के अनुसार, ईरानी व‍िदेश मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब फ्रांस और 25 अन्य देशों ने यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख के साथ मिलकर मृत्युदंड के मामलों को लेकर ईरान की आलोचना की।

अराघची ने खुद को मानवाधिकारों का रक्षक बताने की फ्रांस की कोशिश को खारिज करते हुए कहा कि गाजा में जायोनिस्ट शासन की कार्रवाइयों और ईरान के खिलाफ उसकी आक्रामकता के समर्थन ने उसके किसी भी नैतिक अधिकार के दावे को खत्म कर दिया है।

उनकी यह प्रतिक्रिया फ्रांस के विदेश मंत्रालय के उस बयान के बाद आई, जिस पर फ्रांस और 25 अन्य देशों के साथ-साथ यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कालास के भी हस्ताक्षर थे। इस बयान में ईरान पर प्रदर्शनकारियों को लगातार मृत्युदंड देने और मौत की सजा के इस्तेमाल की आलोचना की गई थी। हस्ताक्षर करने वाले देशों ने तेहरान से यह प्रथा बंद करने और उन लोगों को रिहा करने की मांग की, जिन्हें उन्होंने मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया बताया।

मेहर समाचार एजेंसी के अनुसार, फ्रांस की इस आलोचना को लेकर उस पर दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप भी लगे हैं। आलोचकों का कहना है कि एक तरफ पेरिस खुद को मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थक बताता है। वहीं दूसरी तरफ वह गाजा में अपने सैन्य अभियान के गंभीर और विनाशकारी परिणामों के बावजूद इजरायली शासन का समर्थन करता रहा है। इसके अलावा अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के संघर्ष के दौरान भी उसने ईरान के खिलाफ कदमों का समर्थन किया है।