श्रीनगर, 13 अगस्त (आईएएनएस)। संसदीय समिति ने गुरुवार को जनसांख्यिकीय परिवर्तन को लेकर अपनी तीन दिवसीय यात्रा पूरी कर ली। इस दौरे को विभिन्न समूहों से परामर्श करने के बाद समाप्त किया गया है।
आधिकारिक बयान में कहा गया है कि जनसांख्यिकीय परिवर्तन को लेकर गठित संसदीय समिति ने अपना तीन दिवसीय जम्मू दौरा समाप्त कर लिया। इस दौरे के दौरान समिति ने सरकार और पुलिस अधिकारियों से व्यापक स्तर पर परामर्श किया। वहीं, इस बैठक के अलावा विभिन्न सामुदायिक समूह, संगठन, प्रतिनिधिमंडल से जनसांख्यिकीय परिवर्तन को लेकर जानकारी जुटाई गई।
रिटायर जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नवलेकर ने जम्मू-कश्मीर से जुड़ा अपना कार्यक्रम समाप्त कर लिया। वो मौजूदा समय में उच्चस्तरीय समिति की अध्यक्षता कर रहे हैं।
जस्टिस नवलेकर ने रायसी जिले में स्थित माता वैष्णो देवी में जाकर पूजा की, जबकि बाकी के सदस्य नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए। परामर्श के आखिरी चरण में पनून कश्मीर ने 500 पृष्ठों की जनसांख्यिकीय परिवर्तन से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट समिति के सामने पेश की।
इस प्रतिनिधिमंडल में ‘पनून कश्मीर’ के संयोजक अग्निशेखर, चेयरमैन टीटो गंजू और ‘जोनाराजा इंस्टीट्यूट ऑफ जेनोसाइड एंड एट्रोसिटीज स्टडीज’ के प्रतिनिधि शामिल थे।
इस अध्ययन में ऐतिहासिक कार्यकाल में जनसांख्यिकीय विकास के विषय को शामिल किया गया है। इसके अलावा, इस अध्ययन में दूसरे अहम मुद्दे जैसे जनसंख्या, पलायन, विस्थापित, राजनीतिक प्रतिनिधि और संपत्ति जैसे विषय शामिल हैं। साथ ही, इसमें विशेष रूप से कश्मीर घाटी में हुए विस्थापन के परिणामों के बारे में विस्तार से बताया गया है।
इस समिति ने पब्लिक ओपिनियन फोरम से जुड़े प्रतिनिधियों से संवाद स्थापित किया, जिसमें प्रमुख रूप से अध्यक्ष परवीन कुमार शर्मा और महासचिव डॉ. गोपाल पार्थसारथी शर्मा शामिल हैं, जिन्होंने एक ज्ञापन सौंपा । इस ज्ञापन में मुख्य रूप से जनसांख्यिकीय पैर्टन में हुए बदलाव के बारे में विस्तार से बताया गया। इस फोरम ने म्यांमार और बांग्लादेश से आने वाले प्रवासियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की बात कही है। इसके अलावा, इन अवैध प्रवासियों की मौजूदगी से पैदा होने वाली चुनौतियों का भी जिक्र इस ज्ञापन में किया गया।
यह समिति सोमवार को जम्मू पहुंची और पुलिस अधिकारियों से इस संबंध में परामर्श किया। इसे फिल्ड विजिट का हिस्सा माना गया है। समिति जागती टाउनशिप भी पहुंची। जहां पर विस्थापित होने के बाद बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित आकर बसे। साथ ही, समिति ने नाउल जैसे स्लम एरिया का भी दौरा किया, जहां पर बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुस्लिम आकर रह रहे हैं।
समिति ने तीन दिवसीय दौरे के तहत विभिन्न समितियों और संगठन से जुड़े प्रतिनिधियों से संवाद स्थापित किया। जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से आए शरणार्थी और वेस्ट पाकिस्तानी रेफ्यूजी, टीम जम्मू, गोरखा समाज और वाल्मिकी समाज से जुड़े लोग भी शामिल थे।
केंद्र सरकार ने मई में इस संबंध में एक समिति का गठन किया था। इस समिति का मुख्य काम देश के विभिन्न हिस्सों में आए डेमोग्रॉफिक चेंज का अध्ययन करना है। इस डेमोग्रॉफिक चेंज मुख्य रूप से अवैध अप्रवासियों और दूसरे कई कारणों की वजह से हो रहा है। साथ ही, समिति ने इन मामलों को सुलझाने के लिए उचित कदम उठाने की भी अपील की।

