Friday, August 14, 2026
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आदित्य-एल1 के आंकड़ों से सूर्य के बेहद गर्म कोरोना को समझने में मिली नई जानकारी: भारतीय वैज्ञानिक

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नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। भारत के आदित्य-एल1 सौर मिशन से मिले अवलोकनों ने सूर्य के सबसे बड़े रहस्यों में से एक को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। भारतीय वैज्ञानिकों के अनुसार, इन आंकड़ों से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि सूर्य की बाहरी वायुमंडलीय परत कोरोना उसकी सतह की तुलना में लाखों डिग्री अधिक गर्म कैसे रहती है और लगातार भारी मात्रा में ऊर्जा खोने के बावजूद अपनी गर्मी कैसे बनाए रखती है।

भारत के पहले समर्पित सौर अवलोकन मिशन आदित्य-एल1 से मिले आंकड़ों का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों ने सूर्य के कोरोना के अत्यधिक गर्म रहने की लंबे समय से चली आ रही पहेली को समझने में महत्वपूर्ण संकेत हासिल किए हैं।

ये निष्कर्ष एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में प्रकाशित हुए हैं। अध्ययन का नेतृत्व भारतीय ताराभौतिकी संस्थान (आईआईए) के प्रोफेसर आर. रमेश ने किया है।

अध्ययन से सूर्य की सबसे बाहरी वायुमंडलीय परत को गर्म रखने वाली प्रक्रियाओं और शक्तिशाली सौर विस्फोटों के दौरान होने वाली ऊर्जा की क्षति की भरपाई से जुड़े तंत्र पर नई रोशनी पड़ती है।

सूर्य की तापमान संरचना दशकों से वैज्ञानिकों के लिए पहेली बनी हुई है। सूर्य के केंद्र का तापमान करीब 1.5 करोड़ डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है, जबकि उसकी दिखाई देने वाली सतह, जिसे फोटोस्फीयर कहा जाता है, का तापमान करीब 5,500 डिग्री सेल्सियस है।

हैरानी की बात यह है कि सूर्य के केंद्र से काफी दूर स्थित कोरोना का तापमान करीब 20 लाख डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है और कुछ परिस्थितियों में यह 4 करोड़ डिग्री सेल्सियस तक भी बढ़ जाता है।

ऊर्जा के स्रोत से दूर जाने के बावजूद तापमान का इस तरह बढ़ना सामान्य वैज्ञानिक अपेक्षाओं के विपरीत है। यही कारण है कि कोरोना का अत्यधिक गर्म रहना सौर विज्ञान की सबसे पुरानी अनसुलझी पहेलियों में शामिल है।

कोरोना में ही अत्यधिक शक्तिशाली सौर मौसम संबंधी घटनाएं, जैसे सौर ज्वालाएं और कोरोनल मास इजेक्शन, जन्म लेती हैं। इन विस्फोटों के दौरान सूर्य भारी मात्रा में ऊर्जा और आवेशित कण अंतरिक्ष में छोड़ता है।

इन घटनाओं से पृथ्वी पर खूबसूरत ध्रुवीय ज्योतियां दिखाई दे सकती हैं, लेकिन इनके कारण भू-चुंबकीय तूफान भी पैदा हो सकते हैं, जो बिजली ग्रिड, संचार नेटवर्क, नेविगेशन प्रणालियों और उपग्रहों को प्रभावित कर सकते हैं।

प्रोफेसर रमेश के अनुसार, सूर्य की गतिविधि कम रहने वाले समय में आमतौर पर हर दिन दो से तीन कोरोनल मास इजेक्शन होते हैं। वहीं, सूर्य के 11 वर्षीय सौर चक्र के चरम चरण में इनकी संख्या बढ़कर प्रतिदिन 10 या उससे अधिक हो सकती है।

वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि लगातार इतनी बड़ी मात्रा में ऊर्जा गंवाने के बावजूद सूर्य का कोरोना अपना अत्यधिक तापमान कैसे बनाए रखता है। यदि इस ऊर्जा की भरपाई नहीं होती, तो सूर्य धीरे-धीरे ठंडा होने लगता, जिसका प्रभाव पूरे सौर मंडल पर पड़ सकता है।