Saturday, August 15, 2026
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स्वतंत्रता दिवस पर विनोद बंसल ने किया आत्ममंथन का आह्वान, बोले- अधिकारों के साथ कर्तव्य भी ईमानदारी से निभाएं

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नई दिल्ली, 15 अगस्त (आईएएनएस)। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने देशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन का भी समय है। देश को यह विचार करना चाहिए कि आजादी के 80 वर्षों में उसने क्या हासिल किया और क्या खोया है।

विनोद बंसल ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि पूरा देश एकता और एकजुटता की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है। लोग हाथों में तिरंगा लेकर देश के प्रति अपने दायित्वों और जिम्मेदारियों को निभाने का संकल्प ले रहे हैं।

उन्होंने कहा कि नागरिकों को केवल अपने अधिकारों की बात नहीं करनी चाहिए, बल्कि अपने कर्तव्यों का भी ईमानदारी से पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति पर हर नागरिक को गर्व होना चाहिए और देश के विकास को और गति देने के लिए सभी को मिलकर योगदान करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत लगातार विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है और हर भारतीय को इस यात्रा में सहभागी बनना चाहिए। विकास के रास्ते में किसी तरह की बाधा नहीं बनना चाहिए, बल्कि ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए जिससे देश की प्रगति और तेज हो सके। उन्होंने देशवासियों से राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने और अपने स्तर पर सकारात्मक योगदान देने की अपील की।

वीएचपी प्रवक्ता ने रामराज्य की अवधारणा को आगे बढ़ाने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बन चुका है और अब देश के विकास में प्रत्येक नागरिक की भागीदारी जरूरी है। उनके मुताबिक, जब हर भारतीय भारत के विकास में अपना योगदान देगा, तभी स्वतंत्रता के 80वें वर्ष का उत्सव सार्थक रूप से मनाया जा सकेगा।

वहीं, लोकसभा में राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बंसल ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश की सबसे पुरानी पार्टी, जिसने लंबे समय तक भारत पर शासन किया, उसका राजनीतिक स्तर इस हद तक गिरना दुर्भाग्यपूर्ण है कि वह अपने वर्तमान, अतीत और भविष्य को भूलती दिखाई दे।

उन्होंने प्रधानमंत्री के बारे में की गई कथित टिप्पणियों को आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि शब्दों और वाणी की गरिमा को लगातार तार-तार करना शर्मनाक है। उन्होंने इसे देश की राजनीति के सबसे निचले स्तर का उदाहरण बताया।