नई दिल्ली, 15 अगस्त (आईएएनएस)। एनसीपी शरद पवार गुट के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इसमें विकास और बेरोजगारी के बजाय हिंदू-मुस्लिम मुद्दों पर फोकस किया गया।
उन्होंने यूथ एआई ट्रेनिंग, नक्सलवाद, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 1947 की हिंसा के दावे, पाकिस्तान की धमकी, गोमूत्र खरीदने के पायलट प्रोजेक्ट और रिक्शा ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा की जरूरत पर भी अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की।
नसीम सिद्दीकी ने कहा, “अगर पीएम मोदी इस देश की प्रगति, बेरोजगरी, जीडीपी, सीमा, चीन के अरुणाचल में अतिक्रमण की बात करते, तो हमें बहुत खुशी होती। पीएम मोदी लाल किले का भी इस्तेमाल हिंदू-मुस्लिम, वंदे मातरम और इंकलाब जिंदाबाद जैसे चीजों के लिए ही कर रहे हैं, जो अफसोसजनक है। पीएम पीएम मोदी को युवा और जेन-जी के बारे में बात करनी चाहिए थी। पीएम मोदी ने मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की बात की।”
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे वहां नहीं गए। देश की बात नहीं होती, देश के भविष्य की बात नहीं होती, सिर्फ पार्टियों की बात होती है, अलगाव की बात होती है, और एकता तोड़ने की बात होती है, तो ऐसे में कोई भी जाना पसंद नहीं करेगा।
पीएम मोदी के युवाओं को एआई स्किल ट्रेनिंग देने और छात्रों को ऑनलाइन कोचिंग वाले ऐलान पर सिद्दीकी ने कहा कि ये हास्यपद है कि सरकार देश की युवाओं का रोजगार छीन रही है। सेना में जो लोग 60 साल की उम्र तक काम करते थे, अब उनको चार साल की नौकरी दी जा रही है। हजारों युवाओं ने इसका विरोध किया। सारी चीजें प्राइवटाइज की जा रही है। एयर इंडिया बिक गया, एलआईसी बिक रहा है, सरकार के जितने संस्थाएं थी, सब बिक रही है, रेल बिक रहा है, ट्रेन बिक रहा है।
पुलिसवालों के लिए कीर्ति चक्र सम्मान के योगी सरकार के फैसले को लेकर उन्होंने कहा, “यूपी हो या बिहार या कोई अन्य राज्य हो, वहां किसी प्रकार से आतंकवाद या गुंडागर्दी नहीं होनी चाहिए। जो लोग इस देश में संसदीय भाषा नहीं समझते हैं, उसके लिए सरकार अगर बंदूक का सहारा लेती है तो इसकी भी निंदा नहीं होनी चाहिए। जो लोग इंसानियत की भाषा नहीं समझते हैं, उनके लिए इंसानियत का पाठ कैसे हो सकता है, लेकिन अगर धर्म के आधार पर एनकाउंटर करने वाले लोगों को वीर चक्र या कीर्ति चक्र दिया जाएगा, तो इस देश की रक्षा के लिए जो लोग अपनी शहादत दे रहे हैं, उनका क्या? ठीक है अगर कोई पुलिस वाला अच्छा काम कर रहा है, तो उसे पुलिस मेडल दिया जाए, कोई अन्य पारितोषिक दिया जाए, लेकिन जातिगत आधार पर कोई निर्णय लिया जाता है, तो ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।”

