सोल, 16 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन रूस के साथ अपने संबंधों को लेकर काफी पॉजिटिव हैं। उन्हें उम्मीद है कि दोनों देशों के रिश्ते आने वाले समय में और बेहतर होंगे। किम ने यह बात रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भेजे एक संदेश में कही है। उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया ने रविवार को इसकी जानकारी दी।
योनहाप न्यूज एजेंसी के अनुसार, यह संदेश कोरिया की जापानी औपनिवेशिक शासन से मुक्ति की 81वीं वर्षगांठ के मौके पर पुतिन की ओर से भेजे गए बधाई संदेश के जवाब में दिया गया। उत्तर कोरिया के सरकारी समाचार माध्यम केसीएनए ने बताया कि, किम ने शनिवार को भेजे अपने संदेश में रूस-उत्तर कोरिया संबंधों को साझा संघर्ष और दोस्ती की परंपरा पर आधारित बताया।
किम ने कहा कि वह पुतिन के साथ मिलकर दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने में सक्षम होने पर गर्व महसूस करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच मौजूदा साझेदारी भविष्य में और मजबूत होगी तथा आपसी सहयोग का दायरा बढ़ेगा।
किम और पुतिन के बीच पिछले कुछ वर्षों में रिश्ते तेजी से मजबूत हुए हैं। जून 2024 में पुतिन की प्योंगयांग यात्रा के दौरान दोनों देशों ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते में दोनों देशों के बीच सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करने का प्रावधान भी शामिल है।
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस और उत्तर कोरिया की नजदीकी और बढ़ी है। पश्चिमी देशों और दक्षिण कोरिया के अनुसार, प्योंगयांग ने रूस को हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध कराया है। यही नहीं रूसी सेना की मदद के लिए सैनिक भी भेजे हैं। इसके बदले उत्तर कोरिया को रूस से सैन्य और तकनीकी सहयोग मिलने की आशंका जताई जाती रही है।
पुतिन ने भी अपने संदेश में दोनों देशों के बीच सहयोग को रेखांकित किया। उन्होंने रूस और उत्तर कोरिया के संबंधों को ऐतिहासिक मित्रता से जोड़ते हुए कहा कि दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा एवं स्थिरता के लिए समन्वय कर रहे हैं।
किम के संदेश की टाइमिंग अहम है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने उत्तर कोरिया के साथ संवाद फिर शुरू करने और 1950-53 के कोरियाई युद्ध को औपचारिक रूप से समाप्त करने के लिए शांति व्यवस्था स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, प्योंगयांग ने ली की पहल पर अब तक सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
इस बीच, रूस और उत्तर कोरिया की बढ़ती नजदीकी को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की चिंता बनी हुई है। दोनों देशों के बीच गहराता सैन्य और रणनीतिक सहयोग पूर्वी एशिया के सुरक्षा समीकरणों को भी प्रभावित कर रहा है।

