Sunday, August 16, 2026
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वंदे मातरम विवाद : प्रदीप भंडारी ने पूछा, क्या राहुल गांधी विपक्ष के नेता बनने के लायक हैं?

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नई दिल्ली, 16 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कथित तौर पर ‘वंदे मातरम’ के अपमान पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर जुबानी हमला बोला। उन्होंने पी. चिदंबरम के उस बयान पर भी टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताया है।

प्रदीप भंडारी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “जब देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, तब कांग्रेस हेडक्वार्टर्स में सोनिया गांधी हाथ से इशारा करती हैं कि रुक जाओ। वो इशारा करती हैं कि कांग्रेस हेडक्वार्टर्स में वंदे मातरम को रोका जाना चाहिए। जब नहीं रुकता है, तो दोबारा इशारा करती हैं कि इसे रोका जाना चाहिए।”

भंडारी ने कहा, “मैं पूछना चाहता हूं कि जब कांग्रेस के समर्थक पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते थे, तब इतनी विपत्ति, इतना आक्रोश इनकी लीडरशिप को करते नहीं देखा, लेकिन कांग्रेस हेडक्वार्टर्स में वंदे मातरम का उद्घोष हो रहा था तो सोनिया गांधी ऐसा व्यवहार कर रही थीं जैसे कोई अपराध हो गया। आजादी के दिन ‘वंदे मातरम’ का विरोध करने वाले राहुल गांधी और सोनिया गांधी का रवैया ‘दिमागी नक्सल’ सोच वाले इकोसिस्टम की मानसिकता को दर्शाता है। कांग्रेस ने न केवल देश के स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान किया, बल्कि संविधान, देश की संप्रभुता व अखंडता और देश की 140 करोड़ जनता का भी अपमान किया।”

प्रदीप भंडारी ने कहा, “कल ही केरल की कांग्रेस पार्टी की सरकार ने वंदे मातरम के उद्घोष के आधिकारिक गायन को स्किप किया यानी जो सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने सोचा, उसे केरल की कांग्रेस पार्टी ने इंप्लीमेंट किया। ये कोई इत्तेफाक नहीं था। कांग्रेस पार्टी का जितना भी जस्टिफिकेशन है, वो यही झूठ साबित होता है। उनके (राहुल गांधी और सोनिया गांधी) दिल देश के लिए नहीं, बल्कि हाशिए पर मौजूद ताकतों के लिए धड़कते हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा, “पी. चिदंबरम, जो गर्व से खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहते हैं, मैं उन्हें दिखाना चाहता हूं कि यह आपका कार्यकाल था, जब कांग्रेस पार्टी ने उन नक्सली आतंकवादियों में से एक को भी नहीं मारा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सभी बड़े नक्सली कमांडरों को पूरी तरह खत्म कर दिया गया और इससे परेशान गरीब आदिवासियों को बचाया गया। देश ने नक्सली खतरे को खत्म किया, इसलिए कांग्रेस पार्टी की सोनिया गांधी और राहुल गांधी को 24 घंटे के भीतर माफी मांगनी चाहिए। उन्हें हर उस देशभक्त भारतीय से माफी मांगनी चाहिए जो कांग्रेस के किए गए कामों को देखकर बहुत गुस्से और आक्रोश में है। हालांकि इससे यह भी साफ होता है, क्या विपक्ष के नेता राहुल गांधी विपक्ष के नेता बनने के लायक भी हैं? क्योंकि विपक्ष का कोई भी नेता जो इस देश की संसद को सर्वोच्च मानता है, वह कभी राष्ट्रगीत का अपमान नहीं कर सकता।”

प्रदीप भंडारी ने कहा, “मैं एक और बुनियादी सवाल पूछना चाहता हूं। इस देश की संसद ने हाल ही में ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971’ पारित किया है, जिसमें 2026 में संशोधन किया गया था और इसके तहत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया है। इस अधिनियम की धारा 3 कहती है कि अगर कोई जानबूझकर ‘वंदे मातरम’ का विरोध करता है, तो वह इस अधिनियम का उल्लंघन कर रहा है। इसलिए, जब ‘वंदे मातरम’ इस देश का राष्ट्रीय गीत है, तो कांग्रेस पार्टी की सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने जानबूझकर इसका विरोध किया है, जिससे यह साबित होता है कि वे चरमपंथी ताकतों के साथ खड़े हैं। जो कोई भी चरमपंथी ताकतों के साथ खड़ा होता है, वह हमेशा भारत को आगे ले जाने वाली किसी भी बड़ी पहल या आह्वान से नाराज रहता है और उसका विरोध करता है। इस घटना के बाद, कांग्रेस पार्टी ने सफाई देते हुए कहा कि खड़गे को खड़े होने में दिक्कत हो रही थी।”

राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, “मैं सोनिया गांधी और राहुल गांधी से पांच सवाल पूछना चाहता हूं। पहला: अगर आपके दिल में जरा भी देशभक्ति है, तो क्या आपको करोड़ों लोगों की भावनाओं, स्वतंत्रता सेनानियों, देश के संविधान और राष्ट्रीय तिरंगे का अपमान करने के लिए 24 घंटे के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए लेकिन वे माफी नहीं मांगेंगे, क्योंकि इस पूरे ‘दिमागी नक्सल’ इकोसिस्टम के सरगना और राजनीतिक संरक्षक राहुल गांधी हैं।

दूसरा: अब जब राहुल गांधी का ऑडियो सामने आया है जिसमें साफ तौर पर कहा गया है कि ‘हम वंदे मातरम नहीं गाना चाहते और केरल में कांग्रेस सरकार ने भी सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम को शामिल नहीं किया, तो क्या इससे यह साफ नहीं हो जाता कि कांग्रेस पार्टी पर लगे सभी आरोप कि उनमें राष्ट्रवाद और देशभक्ति की जरा भी भावना नहीं है, सच साबित होते हैं?

तीसरा: इससे यह भी साबित होता है कि जयराम रमेश ने जो कुछ भी कहा, वह सरासर झूठ था।

चौथा: आजादी के दिन वंदे मातरम का विरोध वही कर सकता है, जिसे इस देश की संप्रभुता और अखंडता में विश्वास न हो। क्या कांग्रेस ने देश के संविधान का सक्रिय रूप से विरोध नहीं किया है?

पांचवां: आज देश का हर युवा कांग्रेस पार्टी के दोहरे रवैये को समझता है। युवा और जेन जी, जो ‘जेन पी’ (देशभक्त पीढ़ी) और राष्ट्रवादी पीढ़ी में विश्वास करते हैं। भारत के तिरंगे के प्रति सोनिया गांधी द्वारा दिखाए गए इस अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे और जेन जी कांग्रेस पार्टी से माफी की मांग करता है।”