नई दिल्ली, 17 अगस्त (आईएएनएस)। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद की ओर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को लेकर की गई टिप्पणी पर कांग्रेस पर जुबानी हमला किया। उन्होंने कांग्रेस की विचारधारा और उसके नेताओं के बयानों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पार्टी अपने पुराने राजनीतिक रुख और विवादित बयानों से ध्यान भटकाने के लिए RSS को निशाना बना रही है।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में विनोद बंसल ने कहा कि कांग्रेस ने लंबे समय तक आतंकवाद और कट्टरपंथ से जुड़े लोगों के प्रति नरम रवैया अपनाया। कांग्रेस को पहले अपने भीतर झांकना चाहिए और यह देखना चाहिए कि उसके नेताओं ने अलग-अलग मौकों पर क्या बयान दिए हैं। 15 अगस्त के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम से जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा था और वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ से जुड़े कार्यक्रम हो रहे थे, उस समय कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में जिस तरह से वंदे मातरम का कथित तौर पर अपमान हुआ, वह बेहद निंदनीय है।
बंसल ने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं का नाम लिए बिना कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व से जुड़े लोगों की मौजूदगी में हुई इस घटना का वीडियो कथित तौर पर उनके सोशल मीडिया हैंडल पर भी मौजूद है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं द्वारा वंदे मातरम के प्रति जिस तरह का असम्मान व्यक्त किया गया, वह शर्मनाक है। कांग्रेस को इस तरह के विवादों से बचने के बजाय अपने नेताओं के बयानों और आचरण पर आत्ममंथन करना चाहिए। कांग्रेस-आरएसएस और अन्य संगठनों को लेकर बयान देकर अपने पुराने विवादों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है।
बटला हाउस एनकाउंटर का जिक्र करते हुए विनोद बंसल ने कहा कि कांग्रेस के नेताओं ने अतीत में आतंकवाद से जुड़े मामलों को लेकर ऐसे बयान दिए, जिनसे पार्टी की सोच पर सवाल उठे। उन्होंने कहा कि जब भी भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कोई टिप्पणी होती है और कांग्रेस के नेताओं के बयानों को पाकिस्तान में समर्थन मिलता है, तो इससे कांग्रेस की राजनीति पर सवाल खड़े होते हैं। बंसल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं के कुछ बयानों पर पाकिस्तान में तालियां बजती हैं। कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी के कई नेता एक जैसी भाषा में आरएसएस और संघ परिवार को निशाना बना रहे हैं। बंसल ने इसे ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’ से जोड़ते हुए कहा कि कांग्रेस लगातार ऐसे बयान दे रही है, जो उसके लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदेह साबित हो सकते हैं।
आरएसएस के खिलाफ कांग्रेस नेताओं की टिप्पणियों पर उन्होंने कहा कि संघ के साथ कांग्रेस का राजनीतिक और वैचारिक संघर्ष लंबे समय से चला आ रहा है। बंसल ने दावा किया कि आरएसएस के खिलाफ लगातार बयान देने से कांग्रेस को कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिलने वाला है। कांग्रेस नेताओं के ऐसे बयान पार्टी के लिए नुकसानदेह हैं और अपनी कब्र खुद खोदने जैसे हैं।
योग गुरु बाबा रामदेव के हालिया बयान का समर्थन करते हुए विनोद बंसल ने छात्र प्रदर्शनों में कम उम्र के बच्चों की कथित भागीदारी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि छोटे और मासूम बच्चों की उम्र पढ़ने, लिखने, सोचने और समझने की होती है। ऐसे बच्चों को राजनीतिक या विरोध प्रदर्शनों में शामिल करने से उनके मानसिक विकास और पढ़ाई पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि देश में अनेक समस्याएं हैं और उनका समाधान उन लोगों को करना चाहिए, जो संबंधित विषय के बारे में जिम्मेदारी से सोचते हैं और समाधान निकालने की क्षमता रखते हैं। देश को सुधारना, आगे बढ़ाना और समृद्ध बनाना किसी एक व्यक्ति, संगठन या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा।
वीएचपी प्रवक्ता ने कहा कि भारत आज जिस दिशा में आगे बढ़ रहा है, उसकी दुनिया के कई हिस्सों में सराहना हो रही है। देश में यदि कोई कमी है तो उसे स्वीकार कर उसे दूर करने की जिम्मेदारी भी समाज की ही है। उन्होंने नागरिकों से अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों पर भी ध्यान देने की अपील की। बंसल ने कहा कि लोकतंत्र में केवल अधिकारों की बात करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नागरिक कर्तव्यों का पालन करना भी जरूरी है।
छात्रों और विभिन्न मुद्दों को लेकर होने वाले प्रदर्शनों पर बंसल ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन प्रदर्शन के नाम पर हिंसा, अतिवाद, वैमनस्य, जातिगत भेदभाव या सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। ऐसी गतिविधियां संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार अपनी जगह है, लेकिन विरोध के दौरान कानून और व्यवस्था का पालन भी जरूरी है। देश को आगे बढ़ाने के लिए सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा। उनके मुताबिक, राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन देश के विकास, सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की जिम्मेदारी सभी की है।

