Tuesday, August 18, 2026
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मेघालय के मुख्यमंत्री ने पाइन होम परियोजना का किया उद्घाटन, बताया सतत पर्यटन का मॉडल

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शिलांग, 17 अगस्त (आईएएनएस)। मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने सोमवार को कहा कि दक्षिण-पश्चिम खासी हिल्स जिले के मावलंगविर गांव में विकसित पाइन होम इको-सस्टेनेबल प्रोजेक्ट राज्य में टिकाऊ और समुदाय आधारित विकास का एक आदर्श मॉडल बन सकता है।

सीएम संगमा ने परियोजना का उद्घाटन करते हुए कहा कि पाइन होम यह दिखाता है कि किस तरह पर्यावरण संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक को मिलाकर ऐसा बुनियादी ढांचा तैयार किया जा सकता है, जो स्थानीय समुदायों के लिए आर्थिक अवसर भी पैदा करे।

उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य प्राकृतिक वातावरण को संरक्षित रखते हुए आधुनिक नवाचार को बढ़ावा देना है।” उन्होंने प्राकृतिक हीटिंग सिस्टम, पुनर्चक्रित सामग्री के उपयोग और वर्षा जल संरक्षण जैसी सुविधाओं का भी उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के निर्माण में स्थानीय कारीगरों और श्रमिकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है तथा अधिकांश सामग्री स्थानीय स्तर पर ही जुटाई गई है। इससे स्थानीय कौशल को संरक्षित करने और आर्थिक लाभ समुदाय के भीतर बनाए रखने में मदद मिलेगी।

करीब 5.90 करोड़ रुपए की लागत से सैत्सनात मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से विकसित इस परियोजना में रेस्तरां, सामुदायिक भवन, सम्मेलन एवं प्रशिक्षण सुविधाएं, अतिथि कक्ष और एक पर्यटन सूचना केंद्र शामिल हैं।

संगमा ने कहा कि राज्य सरकार दक्षिण-पश्चिम खासी हिल्स को ऐसा पर्यटन केंद्र बनाना चाहती है, जहां पर्यटक अधिक समय तक ठहरें और स्थानीय अर्थव्यवस्था में अधिक योगदान दें।

उन्होंने सीएम होमस्टे मिशन का भी जिक्र किया, जिसके तहत सरकार का लक्ष्य वर्ष 2028 तक मेघालय में 3,000 होमस्टे स्थापित करना है। इससे रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर पैदा होंगे।

मुख्यमंत्री ने मावसिनराम स्थित त्वाहलोंगवार ओपन-एयर म्यूजियम का भी वर्चुअल उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि ये दोनों परियोजनाएं शिलांग से बाहर भी विकास पहुंचाने की सरकार की सोच को दर्शाती हैं।

संगमा ने कहा, “गारो हिल्स, खासी हिल्स और जयंतिया हिल्स साथ-साथ आगे बढ़ें, यही हमारा लक्ष्य है।” उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों और प्राकृतिक परिवेश पर आधारित परियोजनाओं के जरिए यह लक्ष्य साकार हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने पाइन होम को एक ‘जीवंत प्रयोगशाला’ और त्वाहलोंगवार को एक ‘जीवंत कक्षा’ बताते हुए कहा कि इनके अनुभवों का उपयोग भविष्य में जलवायु-अनुकूल स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों, इको-लॉज और होमस्टे विकसित करने में किया जा सकता है।

उन्होंने मुख्यमंत्री अनुसंधान अनुदान योजना का भी उल्लेख किया, जिसके पहले वर्ष में 48 शोधार्थियों को सहायता दी गई है। वहीं ‘ट्रेसिंग द रूट्स’ पहल के तहत 75 शोधार्थी खासी, जयंतिया और गारो समुदायों की उत्पत्ति और ऐतिहासिक यात्रा का अध्ययन करने के लिए वियतनाम, कंबोडिया और तिब्बत का दौरा करेंगे।

संगमा ने कहा, “जो समाज अपने अतीत और अपनी जड़ों को जानता है, वह भविष्य की ओर अधिक आत्मविश्वास के साथ बढ़ता है।”