शिमला, 17 अगस्त (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास और कार्यान्वयन ट्रस्ट (एनआईसीडीआईटी) के सर्वोच्च निगरानी प्राधिकरण की तीसरी बैठक में वर्चुअल माध्यम से भाग लिया।
बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने की।
बैठक में मुख्यमंत्री ने उन्हें हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने और बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने के लिए विश्व स्तरीय औद्योगिक अवसंरचना विकसित करने के सरकारी प्रयासों से अवगत कराया।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्या) के पहले चरण के तहत सरकार ने निवेश के लिए तैयार औद्योगिक पार्कों के विकास हेतु राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास एवं कार्यान्वयन ट्रस्ट को पहले ही दो प्रस्ताव प्रस्तुत कर दिए हैं। इन औद्योगिक पार्कों में आधुनिक प्लग-एंड-प्ले अवसंरचना सुविधाएं प्रस्तावित हैं। प्रस्तावित परियोजनाओं में ऊना जिले के बीतन गांव में 75 एकड़ में फैला एक औद्योगिक पार्क शामिल है, जिसकी लागत 80 करोड़ रुपए है, और सोलन जिले के नालागढ़ में मझोली औद्योगिक क्षेत्र में 150 एकड़ में फैला एक औद्योगिक पार्क शामिल है, जिसकी लागत 154.39 करोड़ रुपए है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये परियोजनाएं राज्य में औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय आर्थिक विकास के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री से दोनों प्रस्तावों को शीघ्र मंजूरी देने का आग्रह किया ताकि इनका कार्यान्वयन जल्द से जल्द शुरू हो सके।
उन्होंने हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक विस्तार को बढ़ावा देने के लिए रसद और परिवहन अवसंरचना को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने केंद्र सरकार से राज्य में रेल संपर्क सुधारने का आग्रह किया और बद्दी-नालागढ़ रेलवे लाइन के विस्तार की मांग की, क्योंकि बेहतर रेल संपर्क से रसद लागत कम होगी, उद्योगों को बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी, विनिर्माण इकाइयों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और राज्य में निजी निवेश को और प्रोत्साहन मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने आधुनिक अवसंरचना और निवेशक-हितैषी नीतियों के माध्यम से एक सशक्त औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम का उद्देश्य औद्योगिक गलियारों का एक नेटवर्क स्थापित करना है जो आर्थिक विकास के इंजन के रूप में कार्य करेगा, औद्योगीकरण को बढ़ावा देगा और पूरे देश में रोजगार के अवसर पैदा करेगा। यह कार्यक्रम विश्व स्तरीय अवसंरचना विकसित करने, निवेश आकर्षित करने और सतत औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

