Tuesday, August 18, 2026
SGSU Advertisement
Home राष्ट्रीय ब्रिक्स देशों ने सतत जीवनशैली और जलवायु लचीलापन पर काम करने को...

ब्रिक्स देशों ने सतत जीवनशैली और जलवायु लचीलापन पर काम करने को लेकर जताई सहमति

0
5

नई दिल्ली, 18 अगस्त (आईएएनएस)। 12वीं ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक मंगलवार को मंत्रिस्तरीय संयुक्त बयान को सर्वसम्मति से अपनाने के साथ संपन्न हुई। इस संयुक्त बयान में चार परिणाम दस्तावेज शामिल हैं, जिनमें ब्रिक्स संस्थानों के नेटवर्क द्वारा सतत जीवनशैली में ज्ञान साझा करने, शोध और नवाचार को बढ़ावा देना भी शामिल है।

संयुक्त बयान में मरुस्थलीकरण से निपटने, सतत भूमि प्रबंधन और पारिस्थितिकी तंत्र की लचीलापन के लिए एकीकृत भू-परिदृश्य प्रबंधन के ब्रिक्स सिद्धांत भी शामिल हैं। इसके अलावा, इसमें ब्रिक्स देशों में वनाग्नि की तैयारी और प्रतिक्रिया को लेकर साझा समझ और पारंपरिक ज्ञान पर आधारित जन-केंद्रित और समुदाय-आधारित अनुकूलन के जरिए जलवायु लचीलापन बढ़ाने के सिद्धांत भी तय किए गए हैं।

भारत के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा, “सहयोग और आपसी सीख की भावना को दर्शाते हुए, भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत 12वीं ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक के दौरान पर्यावरण कार्य समूह के संकलन लॉन्च किए गए हैं। इन संकलनों में ब्रिक्स सदस्य देशों के अनुभव, नवाचार दृष्टिकोण, पारंपरिक ज्ञान और साझा अनुभवों का समृद्ध संकलन प्रस्तुत किया गया है।

उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण से निर्देशित है, जिसमें ग्लोबल साउथ की चिंताओं को एजेंडे में सबसे आगे रखा गया है और ब्रिक्स को सहयोग और स्थिरता के लिए लचीलापन और नवाचार का निर्माण के रूप में फिर से परिभाषित किया गया है। पीएम मोदी के इस दृष्टिकोण में लोगों को ध्यान में रखते हुए मानवता को अहमियत देने की भावना है।

उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता के दौरान हुई प्रगति महीनों के संवाद, बातचीत और सहयोग का नतीजा है। उन्होंने समुदायों को पीछे छोड़े बिना लचीलापन बनाने, जिम्मेदारी के साथ नवाचार करने और विकास के केंद्र में स्थिरता रखने का आह्वान किया।

जलवायु परिवर्तन मंत्री ने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स ज्ञान नेटवर्क, तकनीकी आदान-प्रदान, प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी सहयोग और मजबूत संस्थागत साझेदारियों के जरिए सहयोग को सामूहिक और सहकारी क्षमता में बदल सकता है।

भूपेंद्र यादव ने जलवायु परिवर्तन, बायोडायवर्सिटी लॉस, प्रदूषण और आपदा के खतरे जैसी बढ़ती वैश्विक जलवायु चुनौतियों पर जोर दिया, खासकर विकासशील देशों के लिए जहां पर्यावरणीय संवेदनशीलता अक्सर बड़े विकास प्राथमिकताओं से जुड़े होते हैं।

उन्होंने जंगल की आग को रोकने, तैयारी, पूर्व चेतावनी, प्रतिक्रिया और आग के बाद की रिकवरी पर ब्रिक्स सहयोग को और मजबूत करने का आह्वान किया। साथ ही जलवायु वित्त, अनुकूलन और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने के महत्व पर भी जोर दिया।

इस संबंध में भारत के दृष्टिकोण पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा, “पारिस्थितिक बहाली और मानव विकास साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।” उन्होंने इसके उदाहरण के रूप में ‘मिशन लाइफ’ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ का जिक्र किया, जो पारिस्थितिक बहाली, जन भागीदारी और सामुदायिक स्वामित्व को जोड़ते हैं।

जलवायु मंत्री ने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को एक साथ लाने का भी आह्वान किया, ताकि समाधान वैज्ञानिक रूप से मजबूत, स्थानीय रूप से प्रासंगिक और सामाजिक रूप से समावेशी हों।

उन्होंने उजागर किया कि 2031-2035 के लिए भारत का नया राष्ट्रीय निर्धारित योगदान जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाने के साथ-साथ समावेशी विकास और ऊर्जा सुरक्षा को समर्थन देने की महत्वाकांक्षी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में पैनल चर्चाएं और साइड इवेंट भी हुए, जिनमें ‘जन-केंद्रित, समुदाय-आधारित अनुकूलन’ विषय पर ब्रिक्स जलवायु परिवर्तन पर उच्चस्तरीय संवाद भी शामिल था।एकीकृत भू-परिदृश्य आधारित हरियाली पर हुई चर्चा में लचीले भू-परिदृश्य और सतत विकास के लिए ब्रिक्स देशों के अनुभव साझा किए गए।