नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। भारत और जापान के बीच आर्थिक एवं रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। केंद्र सरकार ने कहा है कि दोनों देशों के बीच साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, प्रगति और साझा समृद्धि की समान आकांक्षाओं पर आधारित है। इसी कड़ी में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल अगले सप्ताह जापान की यात्रा पर जाएंगे, जहां वह दोनों देशों के बीच निवेश, व्यापार और औद्योगिक सहयोग को नई दिशा देने पर चर्चा करेंगे।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जापानी प्रतिनिधिमंडल के सम्मान में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जापानी कंपनियों को भारत में निवेश और भागीदारी बढ़ाने का निमंत्रण दिया। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित थे।
गोयल ने कहा कि वह 24 से 27 अगस्त के बीच जापान का दौरा करेंगे। इस दौरान वह जापान सरकार और उद्योग जगत के शीर्ष प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करेंगे, ताकि दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत किया जा सके।
उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर लगभग 27.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इसके साथ ही जापान अब भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का पांचवां सबसे बड़ा स्रोत बन चुका है। यह दोनों देशों के आर्थिक संबंधों की मजबूती और भविष्य की संभावनाओं को दर्शाता है।
मंत्री ने कहा कि जापान के यामानाशी प्रीफेक्चर से आए प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि भारत-जापान सहयोग अब केवल राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यों और क्षेत्रीय स्तर तक भी विस्तार कर रहा है।
उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए गोयल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य की बड़ी आबादी, बेहतर होती कनेक्टिविटी, औद्योगिक विकास और कुशल कार्यबल जापानी कंपनियों के लिए निवेश के आकर्षक अवसर प्रदान करते हैं।
गोयल ने कहा कि भारत का युवा कार्यबल और तेजी से बढ़ता बाजार, जापान की तकनीकी विशेषज्ञता के साथ मिलकर दोनों देशों के लिए बड़े आर्थिक अवसर पैदा कर सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत-जापान साझेदारी के परिणाम जमीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना, दिल्ली, अहमदाबाद, बेंगलुरु और चेन्नई में जापान की सहायता से विकसित मेट्रो परियोजनाएं, तथा देश के आठ राज्यों में स्थापित 11 जापानी औद्योगिक टाउनशिप इस सहयोग के प्रमुख उदाहरण हैं।
मंत्री ने बताया कि वर्तमान में भारत में 1,400 से अधिक जापानी कंपनियां कारोबार कर रही हैं, जिनमें सुजुकी, टोयोटा और होंडा जैसी ऑटोमोबाइल कंपनियां, सोनी जैसी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी और हिताची तथा मित्सुबिशी जैसी इंजीनियरिंग कंपनियां शामिल हैं।
पीयूष गोयल ने जुलाई 2026 में नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस शिखर सम्मेलन ने दोनों देशों के संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान की है। उन्होंने विशेष रूप से जापान के उस लक्ष्य का जिक्र किया, जिसके तहत वह अगले एक दशक में भारत में 10 ट्रिलियन येन का निवेश करना चाहता है।

