Wednesday, August 19, 2026
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भाजपा की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी ‘सुविधा की व्यवस्था’ : शिवसेना (यूबीटी)

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मुंबई, 19 अगस्त (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) ने भाजपा की नई घोषित राष्ट्रीय कार्यकारिणी पर निशाना साधा है। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में बुधवार को छपे संपादकीय में कहा गया कि भाजपा की नई टीम में न तो चमक है और न ही इसे काम करने की आजादी मिली है।

शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि लंबे इंतजार के बाद बनी ये नई नेतृत्व संरचना मुख्य रूप से ‘प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की पसंद को लागू करने के लिए’ काम करेगी। संपादकीय में कहा गया कि पार्टी की ‘असली मशीनरी’ अब सत्ता के बाहरी जरियों पर निर्भर है।

संगठनात्मक फेरबदल की टाइमलाइन का जिक्र करते हुए संपादकीय में कहा गया कि नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के करीब 7 महीने बाद नई टीम की घोषणा हुई। संपादकीय में सवाल उठाया गया, “प्रधानमंत्री और गृह मंत्री जिस दिशा में चाहें, पार्टी की गाड़ी को चुपचाप उसी दिशा में चलाने वाले लोग ढूंढने में 7 महीने नहीं लगने चाहिए थे।” साथ ही ये भी पूछा गया कि आखिर इस कार्यकारिणी की जरूरत ही क्या है।

शिवसेना (यूबीटी) ने बिहार का हवाला देते हुए कहा कि इस बीच नितिन नवीन ने बांकीपुर विधानसभा सीट छोड़ी थी। इसके बाद हुए उपचुनाव में भाजपा ये सीट हार गई। संपादकीय के मुताबिक, ये हार प्रशांत किशोर की रणनीतिक मौजूदगी की वजह से हुई।

संपादकीय में कहा गया कि भाजपा की नई नियुक्त टीम पर ‘चुनाव जीतने का कोई असली बोझ’ नहीं है। आरोप लगाया कि चुनाव की मुख्य रणनीति और जमीन पर काम अब राज्य सरकार, पुलिस, पैसे और ईवीएम के जरिए आउटसोर्स कर दिया गया है।

इसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, तुलसी गबार्ड और एलन मस्क के हवाले दिए गए। इन लोगों ने ईवीएम की कमजोरियों और अमेरिका में पेपर बैलट पर भरोसे की बात कही थी। संपादकीय ने इसकी तुलना भारत से करते हुए कहा कि यहां चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट बार-बार पेपर बैलट की मांग ठुकरा रहे हैं।

संगठनात्मक नियुक्तियों में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को भाजपा का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाए जाने पर शिवसेना (यूबीटी) ने नैतिक आपत्ति जताई।

संपादकीय में आरोप लगाया गया कि भाजपा के खजाने में 7,000 करोड़ रुपए से ज्यादा हैं और देशभर में उसके बड़े-बड़े कार्यालय हैं। ऐसे में पीयूष गोयल को संगठन का पद लेने से पहले सरकारी पद से इस्तीफा देना चाहिए था।

अंत में शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि ये फेरबदल ‘सुविधा की व्यवस्था’ है। औपचारिक पद तो बांट दिए गए हैं, लेकिन भाजपा के चुनावी तंत्र की असली कमान पूरी तरह केंद्रीय स्तर पर ही है।