पटना, 19 अगस्त (आईएएनएस)। नूरसराय पुलिस स्टेशन इलाके के पारसी मिडिल स्कूल में मंगलवार को मिड-डे मील खाने के बाद दो दर्जन से ज्यादा बच्चे बीमार पड़ गए। खाना खाने के बाद जब बच्चों को उल्टी और चक्कर आने की शिकायत हुई, तो स्कूल में हड़कंप मच गया। खाने में गलती से रसोइए ने डिटर्जेंट पाउडर मिला दिया था।
सभी बच्चों को इलाज के लिए बिहार शरीफ सदर अस्पताल ले जाया गया। सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह ने अस्पताल जाकर बच्चों का हाल-चाल जाना और बताया कि वे सभी खतरे से बाहर हैं।
स्कूल के प्रिंसिपल शैलेंद्र कुमार सिंह के अनुसार, मंगलवार को मिड-डे मील में चावल और सोयाबीन की डिश परोसी गई थी।
खाने में नमक कम होने की शिकायत के बाद, रसोइए ने गलती से नमक की जगह सर्फ (डिटर्जेंट पाउडर) डाल दिया।
बताया गया कि किचन में नमक और डिटर्जेंट एक ही जगह रखे हुए थे। खाना खाने के कुछ ही देर बाद बच्चों को उल्टी और चक्कर आने लगे। स्कूल में ही प्राथमिक उपचार की कोशिश की गई, लेकिन जब उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ, तो उन्हें सदर अस्पताल भेज दिया गया।
अस्पताल में बड़ी संख्या में बच्चों के पहुंचने के बाद उनके परिवार वाले भी वहां जमा हो गए।
परिवार वालों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में इंतजाम ठीक नहीं थे। उन्होंने बताया कि एक ही बिस्तर पर दो-तीन लड़कियों का इलाज किया जा रहा था।
इस वजह से थोड़ी देर के लिए हंगामा हुआ। बाद में सिविल सर्जन द्वारा बेहतर इलाज का भरोसा दिलाने पर स्थिति शांत हुई।
इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिवार वालों का आरोप है कि बच्चों के बीमार पड़ने की सूचना देने के बावजूद, न तो नूरसराय अस्पताल से एम्बुलेंस भेजी गई और न ही कोई मेडिकल टीम स्कूल पहुंची।
एम्बुलेंस न मिलने के कारण, परिवार वालों को ई-रिक्शा और टेम्पो से बच्चों को सदर अस्पताल ले जाना पड़ा।
परिवार वालों का कहना था कि अगर स्थानीय अस्पताल से समय पर एम्बुलेंस और मेडिकल टीम आ जाती, तो बच्चों को तुरंत मेडिकल मदद मिल सकती थी।
अब बिहार में मिड-डे मील योजना की निगरानी और स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था की आपातकालीन प्रतिक्रिया, दोनों को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।

