कोझिकोड, 20 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मां हीराबेन के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में कोझिकोड शहर साइबर पुलिस ने गुरुवार को मशहूर मेकअप आर्टिस्ट जानमोनी दास को गिरफ्तार कर लिया।
बाद में उन्हें थाने से जमानत पर रिहा कर दिया गया क्योंकि इस मामले में लगाए गए आरोप जमानती हैं।
यह मामला केरल भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष नव्या हरिदास की शिकायत पर दर्ज किया गया था।
एफआईआर के अनुसार, जानमोनी ने समाज में अशांति फैलाने और सार्वजनिक शांति भंग करने के इरादे से प्रधानमंत्री के खिलाफ मानहानिकारक और अपमानजनक टिप्पणी की थी।
गिरफ्तारी के बाद विवाद खड़ा हो गया, और जानमोनी ने कहा कि उनकी टिप्पणी को गलत समझा गया था।
मामला बढ़ने पर उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट कर विवाद के लिए माफी मांगी और मामले में अपना पक्ष स्पष्ट किया।
जानमोनी ने कहा कि दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन से संबंधित सामग्री देखने के बाद मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने ये टिप्पणियां की थीं।
उन्होंने विवाद का कुछ हद तक कारण मलयालम भाषा में अपनी सीमित दक्षता को बताया और कहा कि उनके कहने का इरादा गलत समझा गया।
वीडियो में उन्होंने कहा कि मैंने किसी को आहत करने के इरादे से ये बात नहीं कही थी और यह भी जोड़ा कि वह प्रधानमंत्री की मां के बारे में बात नहीं कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि विवाद की गंभीरता का एहसास उन्हें तब हुआ जब उनके दोस्तों ने उनसे संपर्क किया और बताया कि वीडियो एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
उन्होंने दावा किया कि इसके बाद उन्होंने वीडियो पोस्ट करने वालों से इसे हटाने के लिए कहा। जानमोनी ने यह भी कहा कि वीडियो सामने आने के बाद उन्हें सऊदी अरब, अबू धाबी और भारत के विभिन्न हिस्सों से कई धमकी भरे फोन और संदेश मिले। मुझे नहीं पता कि मुझे क्या करना चाहिए। मुझे कई धमकी भरे फोन आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि साथ ही यह भी जोड़ा कि उन्होंने केवल उस सामग्री के संबंध में एक प्रश्न पूछा था जो उन्होंने देखी थी और वह प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ कोई बयान नहीं दे रही थीं। हालांकि, उनका स्पष्टीकरण राज्य भाजपा महिला मोर्चा इकाई को संतुष्ट नहीं कर पाया है।
संगठन ने उनकी माफी को खारिज करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री और उनकी मां के खिलाफ कथित तौर पर की गई टिप्पणियों को ‘महज भाषा संबंधी गलतफहमी’ कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। इस बीच, पुलिस आरोपों की जांच कर रही है।
एफआईआर में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कथित टिप्पणियां प्रधानमंत्री का अपमान करने और समाज में अशांति और शांति भंग करने के इरादे से की गई थीं।

