Friday, August 21, 2026
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खनिज संशोधन बिल भूमिपुत्रों के साथ अन्याय : राज्यसभा सांसद महुआ माजी

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रांची, 20 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने ‘खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक- 2026’ का विरोध किया। उन्होंने आईएएनएस के साथ बातचीत के दौरान राज्य के अधिकारों की सुरक्षा की मांग की और कहा कि पार्टी केंद्र की नीतियों के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगी।

महुआ माजी ने कहा, “हमारी बैठक का मुख्य मुद्दा माइंस एंड मिनरल्स अमेंडमेंट बिल 2026 का विरोध करना था। दूसरा परिसीमन का और तीसरा एसआईआर को लेकर कुछ समस्याएं हैं, उस पर बातचीत हुई। हम ऐसा मानते हैं कि केंद्र सरकार को खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक रद्द करना होगा। केंद्र सरकार दो-तीन काले कानून लेकर आई थी, उसके खिलाफ जिस तरह से किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया, कई लोग शहीद हुए, उसके बाद मजबूरी में केंद्र सरकार ने उसे रद्द किया।”

उन्होंने कहा, “इसी तरह ये बिल भी राज्य को काफी नुकसान पहुंचाने वाला है। यह भूमिपुत्र-पुत्रियों के साथ बहुत बड़ा अन्याय है। इसलिए हम सभी चाहते हैं कि सरकार इसे रद्द करे। आंदोलन तो शायद कई जगहों पर शुरू भी हो चुका है और उन्हें रोका भी गया है। हमारी पार्टी आंदोलन की पार्टी है। शिबू सोरेन जी ने जो रास्ता दिखाया है, उस पर पार्टी के सभी सदस्यों और कार्यकर्ताओं को चलना है।”

महुआ माजी ने कहा कि जो अभी बिल आया है, उससे यहां पर राज्य सरकार की जितनी भी जनकल्याणकारी योजनाएं हैं, जैसे कि मंईयां सम्मान योजना, जिसका घर-घर में लोग लाभ उठा रहे हैं, या आवास योजना, या स्कॉलरशिप योजना, जो भी है, सभी पर प्रभाव पड़ेगा। इसलिए हम चाहते हैं कि सरकार इसे रद्द करे। आने वाले समय में राज्यों को उनका हक और अधिकार दे। सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की बेंच ने इस पर मुहर लगाई थी। आप सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भी नहीं मानते हैं क्या?

झारखंड में छात्रों की मांगों को लेकर भाजपा पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग नौकरी कर रहे हैं, वो कोर्ट की शरण में जाते ही हैं। अब कोर्ट का निर्णय सर्वोपरि है। भाजपा के लोगों ने कुछ छात्रों के साथ मिलकर बहुत दबाव बनाने की कोशिश की। कुछ लोग अनशन पर बैठे थे, ऐसे में सरकार ने छात्रहित में निर्णय लिया। अब आगे कोर्ट पर निर्भर है। आप अगर छात्र हित चाहते हैं कि उनके लिए कुछ चीजें करनी पड़ती है। जिस तरह से उन्होंने आंदोलन किया और जिस तरह से राजनीतिक दल इसका गलत इस्तेमाल कर रहे थे, छात्रों को उकसा रहे थे, ये राज्य में शांति बहाली या छात्रों के भविष्य को देखते हुए कुछ करना पड़ता है।