नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) योजना किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने, मजबूरी में बिक्री को रोकने और कृषि बाजार को अधिक स्थिर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण तंत्र के रूप में उभरी है। शुक्रवार को सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, इस योजना ने कृषि खरीद, मूल्य स्थिरीकरण और बाजार हस्तक्षेप को अधिक प्रभावी बनाकर किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
फैक्टशीट के मुताबिक, पीएम-आशा के तहत दलहन, तिलहन और खोपरा की समय पर खरीद सुनिश्चित की गई है। इस कार्य में नाफेड यानी राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया-एनएएफईडी) और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया-एनसीसीएफ) जैसी एजेंसियां प्रमुख भूमिका निभा रही हैं। किसानों को अपनी उपज बेचने में सुविधा देने के लिए अतिरिक्त खरीद केंद्र भी स्थापित किए गए हैं, जिससे बाजार तक उनकी पहुंच मजबूत हुई है।
सरकार ने कहा कि पीएम-आशा देश की प्रमुख मूल्य समर्थन योजना है, जिसने डिजिटल सुधारों और बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ मिलकर खरीद व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, कुशल और व्यापक बनाया है, जिससे विभिन्न राज्यों में किसानों को बेहतर लाभ मिलने लगा है।
बयान में कहा गया है कि योजना के तहत लागू किए गए डिजिटल सुधारों में आधार-आधारित प्रमाणीकरण, ई-एनएएम, ई-समृद्धि और ई-सम्युक्ति जैसे मंच शामिल हैं। इन पहलों ने खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और भुगतान व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद की है।
इसके अलावा, कृषि अवसंरचना कोष (एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड) से मिले समर्थन और खरीद कवरेज के विस्तार ने भी योजना की प्रभावशीलता को बढ़ाया है। सरकार का मानना है कि तकनीक-आधारित सुधारों से किसानों को सीधे लाभ पहुंच रहा है और बिचौलियों पर निर्भरता कम हो रही है।
पीएम-आशा के लिए बजटीय आवंटन में भी लगातार वृद्धि की गई है। वर्ष 2024-25 में योजना के तहत वास्तविक व्यय 5,437.99 करोड़ रुपए रहा। इसके बाद 2025-26 में बजट बढ़ाकर 6,941.36 करोड़ रुपए किया गया और 2026-27 में इसे बढ़ाकर 7,200 करोड़ रुपए कर दिया गया। यह किसानों की आय सुरक्षा और न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली को मजबूत करने के प्रति सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता है।
फैक्टशीट में विभिन्न फसलों के उत्पादन लागत और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के बीच अंतर का भी उल्लेख किया गया है। वर्ष 2026-27 में सामान्य धान की उत्पादन लागत 1,627 रुपए प्रति क्विंटल रही, जबकि इसका एमएसपी 2,441 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया, जिससे किसानों को 814 रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त लाभ मिला।
इसी प्रकार पीली सोयाबीन की उत्पादन लागत 3,805 रुपए प्रति क्विंटल रही, जबकि इसका एमएसपी 5,708 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया। इससे किसानों को 1,903 रुपए प्रति क्विंटल का लाभ प्राप्त हुआ।
फैक्टशीट में आगे कहा गया है कि गेहूं की उत्पादन लागत 1,239 रुपए प्रति क्विंटल रही और इसका एमएसपी 2,585 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया, जिससे किसानों को 1,346 रुपए प्रति क्विंटल का लाभ मिला।
वहीं जूट के मामले में सबसे अधिक लाभ का अंतर देखने को मिला। इसकी उत्पादन लागत 3,662 रुपए प्रति क्विंटल थी, जबकि एमएसपी 5,925 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया, जिससे किसानों को 2,293 रुपए प्रति क्विंटल का लाभ प्राप्त हुआ।

