नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार को देश में एच1एन1 इन्फ्लूएंजा की मौजूदा स्थिति और तैयारियों की समीक्षा की, जिसमें विशेष रूप से राष्ट्रीय राजधानी पर ध्यान केंद्रित किया गया।
मीटिंग में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह और स्वास्थ्य अधिकारी शामिल थे। मीटिंग का उदेश्य इन्फ्लूएंजा और इससे होने वाली संभावित जटिलताओं से पीड़ित मरीजों के लिए तैयारियों और व्यवस्थाओं को मजबूत करना था।
राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) के आंकड़ों के अनुसार, 12 अगस्त तक दिल्ली में एच1एन1 के लगभग 1,449 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले साल इसी अवधि में दर्ज किए गए 229 मामलों की तुलना में छह गुना से अधिक की वृद्धि है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एच1एन1 के अलावा दिल्ली में इस वर्ष इन्फ्लूएंजा बी (यामागाता) के 184 मामले दर्ज किए गए हैं।
इससे पहले, दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि बढ़ते मामलों से निपटने के लिए सफदरजंग अस्पताल, राम मनोहर लोहिया अस्पताल और दिल्ली सरकार के अन्य अस्पतालों में विशेष वार्ड बनाए गए हैं।
पंकज कुमार सिंह ने कहा कि दिल्ली सरकार के अस्पतालों में डॉक्टर मरीजों का उचित इलाज कर रहे हैं और हमने दवाइयों, बिस्तरों और वेंटिलेटर के मामले में पर्याप्त व्यवस्था की है।
2019 में, दिल्ली में एच1एन1 के 3,637 मामले और इससे संबंधित 31 मौतें दर्ज की गईं। एच1एन1 इन्फ्लूएंजा ‘ए’ वायरस का एक प्रकार है जो मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है।
डॉक्टरों के अनुसार, एच1एन1 संक्रमण नाक, गले और फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है, जिसके लक्षणों में आमतौर पर बुखार, खांसी, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान, पसीना आना और ठंड लगना शामिल हैं।
अधिकांश इन्फ्लूएंजा संक्रमण स्वतः ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ रोगियों में वायरल निमोनिया, द्वितीयक जीवाणु निमोनिया या पहले से मौजूद हृदय और फेफड़ों की स्थिति बिगड़ने जैसी जटिलताएं विकसित हो सकती हैं।
डॉक्टर आमतौर पर इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षणों वाले लोगों को अपनी स्थिति पर नजर रखने और लक्षण गंभीर होने या लगातार बिगड़ने पर चिकित्सा सहायता लेने की सलाह देते हैं। सांस लेने में कठिनाई, लगातार सीने में दर्द, भ्रम, अत्यधिक कमजोरी या निर्जलीकरण ऐसे लक्षण हैं जिनके लिए तत्काल चिकित्सा जांच की आवश्यकता होती है।
एक अलग घटनाक्रम में मंत्रालय ने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव (नीति) की अध्यक्षता में आज पीएम-एबीएचआईएम और 15वें वित्त आयोग (15वें एफसी) स्वास्थ्य अनुदान पर एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बयान में कहा गया कि पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, दादरा एवं नगर हवेली, दमन एवं दीव, लक्षद्वीप, पुडुचेरी, केरल, जम्मू एवं कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में हुई प्रगति की समीक्षा की गई।
बयान में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से भौतिक और वित्तीय प्रगति में तेजी लाने तथा स्वीकृत स्वास्थ्य अवसंरचना और सुविधाओं के समय पर पूरा होने और संचालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया।

