Friday, August 21, 2026
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मुक्त व्यापार समझौते भारत के निर्यात और वैश्विक व्यापार विस्तार के लिए बेहद महत्वपूर्ण: ब्लू स्टार के सीएमडी

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मुंबई, 21 अगस्त (आईएएनएस)। भारत और अमेरिका के बीच संभावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर उद्योग जगत की उम्मीदों के बीच ब्लू स्टार लिमिटेड के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (एमडी) तथा भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) पश्चिमी क्षेत्र के अध्यक्ष वीर एस. आडवाणी ने शुक्रवार को कहा कि मुक्त व्यापार समझौते भारत के निर्यात और वैश्विक व्यापार विस्तार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में भू-राजनीतिक बदलाव लगातार होते रहेंगे और उद्योगों को इन चुनौतियों के बीच आगे बढ़ना होगा।

न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए वीर एस. आडवाणी ने कहा, “एफटीए बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि हाल के समय में भारत ने कई मित्र देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे देश भारतीय निर्यातकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बाजार हैं। भू-राजनीतिक घटनाक्रम आगे भी जारी रहेंगे और समय-समय पर बदलाव आते रहेंगे।”

भारत-अमेरिका संभावित व्यापार समझौते पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि फिलहाल कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है, इसलिए इसकी शर्तों और प्रभावों पर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।

आडवाणी ने आगे कहा, “भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते की चर्चा जरूर चल रही है, लेकिन अभी तक कोई समझौता हस्ताक्षरित नहीं हुआ है। इसलिए इसकी वास्तविक स्थिति क्या है, यह स्पष्ट नहीं है।”

उन्होंने कहा कि इस बीच ईरान और पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट ने वैश्विक व्यापार के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। उन्होंने कहा कि 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जाने की आशंका भी बनी हुई है, जिसका असर भारतीय निर्यात पर पड़ सकता है।

आडवाणी ने कहा, “ईरान और पश्चिम एशिया संकट के कारण 100 प्रतिशत टैरिफ का खतरा पैदा हो गया है, जिसका भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखना होगा। हालांकि भारत सरकार अमेरिका के साथ लगातार बातचीत कर रही है ताकि भारतीय निर्यात पर इसका असर न्यूनतम रहे।”

मुंबई में आयोजित सीआईआई ग्लोबल ट्रेड सीनारियो के 7वें संस्करण को लेकर आडवाणी ने कहा कि यह कार्यक्रम वैश्विक व्यापार की बदलती परिस्थितियों को समझने के लिए महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। उन्होंने कहा, “यह सम्मेलन बहुत महत्वपूर्ण है। इसका यह सातवां संस्करण है और इसे हर वर्ष मुंबई में आयोजित किया जाता है क्योंकि महाराष्ट्र भारत का सबसे बड़ा निर्यातक राज्य है। महाराष्ट्र और गुजरात दोनों पश्चिमी क्षेत्र में आते हैं और हम सीआईआई के पश्चिमी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।”

उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार के मौजूदा माहौल में भारतीय उद्योगों के सामने अवसर और चुनौतियां दोनों मौजूद हैं, इसलिए ऐसे मंच सरकार, उद्योग और निर्यातकों के बीच संवाद को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

देश की लॉजिस्टिक्स और निर्यात क्षमताओं पर बात करते हुए आडवाणी ने आईएएनएस से कहा कि भारत को अपनी बंदरगाह क्षमता में बड़े पैमाने पर विस्तार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (जेएनपीए) एक अच्छा बंदरगाह है, लेकिन देश के विनिर्माण क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए मौजूदा क्षमता पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने कहा, “जेएनपीए एक अच्छा पोर्ट है, लेकिन भारतीय निर्माताओं के लिए 10 मिलियन टीईयू की क्षमता पर्याप्त नहीं है। देश को इससे कहीं अधिक पोर्ट क्षमता की जरूरत है। हमें खुशी है कि वधावन पोर्ट विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना कई दशकों से विचाराधीन रही है और मेरा मानना है कि करीब 30 वर्ष पहले पहली बार इसकी घोषणा की गई थी।”

वधावन पोर्ट परियोजना से जुड़े सवालों पर आडवाणी ने कहा कि किसी भी बड़े ग्रीनफील्ड पोर्ट प्रोजेक्ट में तकनीकी चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन सरकार ने परियोजना को अंतिम रूप देते समय विभिन्न पहलुओं पर विचार किया होगा।

उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार और उद्योग जगत के संयुक्त प्रयासों से भारत वैश्विक व्यापार की चुनौतियों का सामना करने और नए अवसरों का लाभ उठाने में सफल रहेगा।