बेंगलुरु, 21 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक सरकार ने अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों के हितों की रक्षा और उन्हें स्पष्ट कानूनी अधिकार देने के उद्देश्य से कर्नाटक अपार्टमेंट (स्वामित्व एवं प्रबंधन) विधेयक, 2026 विधानसभा में पेश किया है। यह जानकारी बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने शुक्रवार को दी।
विधानसभा में विधेयक पेश करते हुए मंत्री ने कहा कि यह कानून कर्नाटक में तेजी से बढ़ रही अपार्टमेंट संस्कृति से जुड़ी समस्याओं जैसे निवासियों के बीच विवाद, प्रशासनिक भ्रम और बिल्डरों से जुड़े विवादित मामलों का समाधान करने के लिए लाया गया है।
उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे शहरों का विस्तार हो रहा है, जमीन सीमित और मूल्यवान संसाधन बनती जा रही है। इसी कारण बड़ी संख्या में लोग अपार्टमेंट में रहना पसंद कर रहे हैं। लेकिन, 1972-73 के पुराने कानूनों और रेरा के तहत मौजूदा व्यवस्था आज की जरूरतों के अनुसार उभर रही जटिल समस्याओं का समाधान करने में पर्याप्त नहीं रही है।”
मंत्री ने कहा कि स्पष्ट और व्यापक कानूनी ढांचे की कमी के कारण कई समस्याएं बार-बार सामने आती रही हैं। कई अपार्टमेंट परिसरों में दो या तीन अलग-अलग एसोसिएशन पंजीकृत हैं, जिससे निवासियों के बीच विवाद पैदा होते हैं। इसके अलावा, सामान्य उपयोग वाले क्षेत्रों, सड़कों और परिसर की दीवारों के स्वामित्व और नियंत्रण को लेकर बिल्डरों और निवासियों के बीच लगातार विवाद बने रहते हैं। पुराने और जर्जर अपार्टमेंट भवनों के पुनर्विकास के लिए भी कोई स्पष्ट कानूनी व्यवस्था नहीं थी।
उन्होंने कहा कि इस विधेयक का मसौदा अपार्टमेंट निवासियों और अन्य संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा के बाद तैयार किया गया है। जब डीके शिवकुमार उपमुख्यमंत्री थे, तब अपार्टमेंट निवासियों के साथ पहली बैठक हुई थी। इसके बाद करीब दो महीने पहले एक और बैठक आयोजित की गई। निवासियों के सुझावों और प्रतिक्रियाओं को मसौदे में शामिल किया गया और फिर इसे सार्वजनिक सुझावों के लिए भी जारी किया गया।
उन्होंने कहा, “जनता से मिले सुझावों पर विचार करने के बाद अब एक व्यापक और परिपक्व विधेयक तैयार कर विधानसभा में पेश किया गया है।”
प्रत्येक अपार्टमेंट प्रोजेक्ट में केवल एक पंजीकृत रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन होगी। एक ही अपार्टमेंट प्रोजेक्ट के लिए अन्य कानूनों के तहत अलग-अलग एसोसिएशन बनाने की अनुमति नहीं होगी। बिल्डर अपार्टमेंट प्रोजेक्ट के सामान्य क्षेत्रों, सड़कों और खुले स्थानों को निजी तौर पर बेच, हस्तांतरित या उनमें बदलाव नहीं कर सकेंगे। इन साझा क्षेत्रों का प्रबंधन और रखरखाव निवासी एसोसिएशन को सौंपना अनिवार्य होगा।
विवादों के समाधान के लिए ग्राम पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम स्तर पर सक्षम प्राधिकारी और अपीलीय प्राधिकारी नियुक्त किए जाएंगे।
इन प्राधिकरणों को सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां दी जाएंगी, जिससे निवासियों को विवाद निपटाने का आसान कानूनी मंच मिलेगा। पुराने और संरचनात्मक रूप से जर्जर अपार्टमेंट भवनों के पुनर्विकास के लिए स्पष्ट कानूनी व्यवस्था की गई है।
पुनर्विकास के लिए कम से कम 75 प्रतिशत अपार्टमेंट मालिकों की सहमति जरूरी होगी। यदि कोई मालिक पुनर्विकास के लिए सहमत नहीं होता है, तो उसकी संपत्ति का अधिग्रहण स्वतंत्र मूल्यांकन के आधार पर बाजार मूल्य के दोगुने मुआवजे के साथ किया जा सकेगा।
मंत्री ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य अपार्टमेंट स्वामित्व और प्रबंधन में अधिक स्पष्टता, जवाबदेही और कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह निवासियों को लंबे समय तक चलने वाले विवादों से बचाने और अपार्टमेंट मालिकों, निवासी संघों तथा बिल्डरों के बीच बेहतर और व्यवस्थित संबंध स्थापित करने में मदद करेगा।

