Saturday, August 22, 2026
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संघ प्रचारक और विवेकानंद शीला स्मारक के शिल्पी एकनाथ रानडे की पुण्यतिथि पर नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की

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नई दिल्ली, 22 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक और विश्व विख्यात विवेकानंद शीला स्मारक के शिल्पी एकनाथ रानडे की पुण्यतिथि पर कई नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की है।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “विश्व विख्यात विवेकानंद शीला स्मारक के शिल्पी श्रद्धेय एकनाथ रानडे जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र अभिवादन।”

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्रद्धेय एकनाथ रानडे जी की पुण्यतिथि पर सादर नमन। राष्ट्रसेवा एवं समाज जागरण के प्रति उनका जीवन समर्पण और अनुशासन की प्रेरणादायी मिसाल रहा। संगठन को सशक्त बनाने तथा राष्ट्रीय चेतना के विस्तार में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।”

बिहार सरकार में मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “विश्वविख्यात ‘विवेकानंद शिला स्मारक’ के शिल्पकार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं राष्ट्रसेवा को समर्पित महान कर्मयोगी श्री एकनाथ रानडे जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। राष्ट्र एवं समाज के प्रति उनका समर्पण, संगठन कौशल और सेवा भाव सदैव हम सभी को प्रेरणा देता रहेगा।”

भाजपा के राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा ने सोशल मीडिया पर लिखा, “1962 में एकनाथ रानडे अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख बने। 1963 में स्वामी विवेकानंद की जन्म शताब्दी मनाई गयी। इसी समय कन्याकुमारी में जिस शिला पर बैठकर स्वामी जी ने ध्यान किया था, वहां स्मारक बनाने का निर्णय कर एकनाथ को यह कार्य सौंपा गया। दक्षिण में ईसाइयों का काम बहुत बढ़ रहा था। उन्होंने तथा राज्य और केंद्र सरकार ने इस कार्य में बहुत रोड़े अटकाये; पर उन्होंने हर समस्या का धैर्यपूर्वक समाधान निकाला।

दिनेश शर्मा ने ‘एक्स’ पर लिखा, “इसके स्मारक के लिए बहुत धन चाहिए था। विवेकानन्द युवाओं के आदर्श हैं, इस आधार पर एकनाथ ने जो योजना बनाई, उससे देश भर के विद्यालयों, छात्रों, राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों और धनपतियों ने इसके लिए पैसा दिया। इस प्रकार सबके सहयोग से बने स्मारक का उद्घाटन 1970 में उन्होंने राष्ट्रपति वराहगिरि वेंकटगिरि से कराया। 1972 में उन्होंने विवेकानंद केंद्र की गतिविधियों को सेवा की ओर मोड़ा। युवक एवं युवतियों को प्रशिक्षण देकर देश के वनवासी अंचलों में भेजा गया। यह कार्य आज भी जारी है। केंद्र से अनेक पुस्तकों तथा पत्र पत्रिकाओं का प्रकाशन भी हुआ।”

मुंबई की महापौर रितू तावड़े ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “कन्याकुमारी में समुद्र की उत्ताल तरंगों के बीच भव्य ‘विवेकानंद रॉक मेमोरियल’ के निर्माण के मुख्य सूत्रधार एवं विवेकानंद केंद्र के संस्थापक श्रद्धेय एकनाथ रानडे जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत-शत नमन। उनका त्यागमय जीवन और ‘राष्ट्र-प्रथम’ का संकल्प हम सभी को निरंतर कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।”