नई दिल्ली, 22 अगस्त (आईएएनएस)। राज्यसभा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने रेलवे बोर्ड के उस निर्णय का कड़ा विरोध किया है, जिसके तहत 1 अक्टूबर 2026 से मंगलूरु क्षेत्र को उल्लाल सहित दक्षिण रेलवे के पालक्काड मंडल से हटाकर दक्षिण पश्चिम रेलवे के मैसूर मंडल में शामिल किया जाना प्रस्तावित है। उन्होंने इस फैसले को केरल के रेलवे हितों के लिए गंभीर झटका बताते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
रेल मंत्री को लिखे पत्र में डॉ. ब्रिटास ने कहा कि यह निर्णय पालक्काड मंडल की क्षेत्रीय, वित्तीय और परिचालन क्षमता को और कमजोर करेगा। उन्होंने कहा कि देश के सबसे पुराने प्रमुख रेलवे मंडलों में शामिल पालक्काड मंडल पहले ही कई पुनर्गठन प्रक्रियाओं के कारण अपने अधिकार क्षेत्र का बड़ा हिस्सा खो चुका है।
डॉ. ब्रिटास के अनुसार, वर्ष 2007 में सलेम मंडल के गठन के दौरान पालक्काड मंडल से लगभग 550 रूट किलोमीटर क्षेत्र अलग कर दिया गया था। इसके बाद मंडल का अधिकार क्षेत्र काफी कम हो गया और वर्तमान में यह दक्षिण रेलवे का सबसे छोटा तथा देश के सबसे छोटे रेलवे मंडलों में से एक बन चुका है। उनका कहना है कि अब मंगलूरु क्षेत्र के स्थानांतरण से इसकी दीर्घकालिक व्यवहार्यता पर गंभीर असर पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि मंगलूरु क्षेत्र पालक्काड मंडल की वित्तीय और परिचालन रीढ़ माना जाता है। मंडल की कुल मालभाड़ा आय का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है, जबकि कुल राजस्व का आधे से अधिक भाग भी यहीं से प्राप्त होता है। विशेष रूप से पनंबूर फ्रेट और मार्शलिंग यार्ड मंगलूरु बंदरगाह से जुड़े बड़े माल परिवहन संचालन का महत्वपूर्ण केंद्र है।
सांसद ने आशंका जताई कि इस स्थानांतरण के बाद पालक्काड मंडल को हर वर्ष लगभग 1,000 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हो सकता है। इससे न केवल आय में कमी आएगी, बल्कि नई ट्रेनों की शुरुआत, विशेष ट्रेनों के संचालन और आधारभूत रेल सुविधाओं के विस्तार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
डॉ. ब्रिटास ने वर्ष 2007 के रेलवे पुनर्गठन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय केरल की चिंताओं को दूर करने के लिए आधुनिक रेल कोच फैक्ट्री का आश्वासन दिया गया था, जो बाद में कंजीकोड रेल कोच फैक्ट्री परियोजना के रूप में सामने आई। हालांकि, बाद में इस परियोजना को भी समाप्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि 31 जुलाई 2026 को राज्यसभा में उनके प्रश्न के उत्तर में रेलवे मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया था कि कंजीकोड परियोजना को निरस्त कर दिया गया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि इतने महत्वपूर्ण निर्णय से पहले पालक्काड मंडल की वित्तीय स्थिति, कर्मचारियों, मालभाड़ा आय, यात्री सेवाओं और भविष्य की निवेश क्षमता पर पड़ने वाले प्रभाव का व्यापक अध्ययन क्यों नहीं किया गया। साथ ही, राज्य सरकार, सांसदों, रेलवे कर्मचारियों और अन्य हितधारकों से पर्याप्त परामर्श भी नहीं किया गया।
डॉ. ब्रिटास ने कहा कि मंगलूरु के विकास को किसी विशेष दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, मंगलूरु को एक प्रमुख रेलवे केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है, जबकि उसे पालक्काड मंडल के अंतर्गत भी रखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि कोझिकोड-मंगलूरु सेक्टर में वर्तमान में 47 जोड़ी ट्रेनें, जिनमें दो वंदे भारत एक्सप्रेस शामिल हैं, संचालित होती हैं। वहीं मंगलूरु-तिरुवनंतपुरम वंदे भारत सेवा को भी यात्रियों की मांग को देखते हुए कई बार विस्तार दिया गया है।
उन्होंने मंगलूरु-कासरगोड-शोरानूर रेल कॉरिडोर पर चल रही क्षमता विस्तार योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण यात्री और माल परिवहन मार्ग पर संस्थागत विभाजन बढ़ाना व्यवहारिक नहीं है।
सांसद ने यह भी कहा कि केरल लंबे समय से राज्य के लिए अलग रेलवे जोन और मजबूत रेलवे संस्थानों की मांग करता रहा है, लेकिन अब तक इन मांगों पर सार्थक प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे पुनर्गठन की प्रक्रियाओं में पालक्काड मंडल पहले ही अपना पर्याप्त हिस्सा खो चुका है और केरल से बार-बार उसके रेल संसाधन छीनना उचित नहीं है।
डॉ. जॉन ब्रिटास ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से अपील की है कि वे इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर रेलवे बोर्ड के फैसले पर पुनर्विचार करवाएं तथा मंगलूरु क्षेत्र को पालक्काड मंडल से अलग करने के निर्णय को वापस लें, ताकि पालक्काड मंडल की दीर्घकालिक स्थिरता और मालाबार क्षेत्र के रेलवे विकास हितों की रक्षा की जा सके।

