Sunday, August 23, 2026
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सीपीआई-एम ने पहली बार किसी महिला को सौंपी डीवाईएफआई की कमान, चिंथा जेरोम को प्रदेश अध्यक्ष की कमान

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त्रिशूर, 23 अगस्त (आईएएनएस)। सीपीआई-एम की युवा शाखा, डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) ने इतिहास में पहली बार केरल यूनिट की कमान एक महिला को सौंपी है। चिंथा जेरोम को राज्य अध्यक्ष का पद सौंपा गया है। जेरोम ऐसे समय में अध्यक्ष बनाई गई हैं, जब संगठन और मुख्य पार्टी, दोनों के सामने अपनी राजनीतिक साख को फिर से मजबूत करने की चुनौती है।

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (एसएफआई) से अपनी पहचान बनाने वाली कोल्लम की रहने वाली चिंथा जेरोम को त्रिशूर में हुए डीवाईएफआई के 16वें राज्य सम्मेलन में चुना गया। डीवाईएफआई के अखिल भारतीय अध्यक्ष ए.ए. रहीम ने नई लीडरशिप की घोषणा की, जिसमें कल्यासेरी के विधायक और एसएफआई के पूर्व राज्य सचिव एम. विजिन को राज्य सचिव और आर. राहुल को कोषाध्यक्ष बनाया गया है।

चिंथा जेरोम एक प्रमुख छात्र और युवा नेता होने की वजह से पिछले कुछ सालों में कई विवादों के केंद्र में रही हैं, जिनमें उनकी डॉक्टरेट थीसिस और सार्वजनिक बयानों से जुड़े मामले शामिल हैं। इसके बाद भी सीपीआई(एम) के संगठनात्मक ढांचे में उनको महत्वपूर्ण पद मिला है।

चिंथा जेरोम, मौजूदा वक्त में डीवाईएफआई की केंद्रीय समिति और सीपीआई-एम की राज्य समिति की सदस्य हैं और उन्होंने केरल विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में डॉक्टरेट की है। चिंथा जेरोम के तौर पर नई लीडरशिप बनने की वजह से तिरुवनंतपुरम की पूर्व मेयर आर्या राजेंद्रन के लिए चूक गया मौका भी है, जिनको लेकर नई टीम में किसी बड़े पद पर आने की चर्चा थी।

आर्या राजेंद्रन को 25 सदस्यीय राज्य सचिवालय में शामिल किया गया है। राजेंद्रन का राजनीतिक सफर नई लीडरशिप के लिए एक सबक भी है। जब राजेंद्रन कम उम्र में वर्ष 2020 में तिरुवनंतपुरम की मेयर बनी थीं, तो सीपीआई-एम ने उन्हें नई पीढ़ी की लीडरशिप के प्रतीक के तौर पर पेश किया था।

लेकिन उनके कार्यकाल से जुड़े विवादों की वजह से छवि धुमिल हुई। 2025 के स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा ने ऐतिहासिक सफलता हासिल करते हुए चार दशकों से ज्यादा समय के बाद सीपीआई-एम से तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन का नियंत्रण छीन लिया।

विधानसभा चुनावों में सचिन देव हार गए, लेकिन अब उन्हें डीवाईएफआई के नए पदाधिकारियों में चार नए उपाध्यक्षों में से एक के तौर पर नियुक्त किया गया है। पिछले दशक के ज्यादातर समय में, डीवाईएफआई ने एक अनुकूल राजनीतिक माहौल में काम किया था, क्योंकि पिछली पिनाराई विजयन सरकार सत्ता में थी।

चिंथा जेरोम और उनकी नई टीम के लिए युवाओं को एकजुट करने की ही चुनौती नहीं है, बल्कि उस आंदोलन की विश्वसनीयता और राजनीतिक अहमियत को फिर से खड़ा करने की भी चुनौती है, जिसकी मुख्य पार्टी (सीपीआई-एम) खुद वापसी का रास्ता तलाश रही है।