देहरादून, 25 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तराखंड की वादियों में छिपा हर एक मंदिर अपनी धार्मिक अद्भुत कहानी के साथ स्थापित है। ऐसा ही एक दिव्य और शांत स्थल पैड़ी गढ़वाल जिले के घने देनदार के जंगलों के बीच बसा श्री तारकेश्वर महादेव मंदिर भी अपनी अनूठी कहानी कहता है। मान्यता है कि ताड़कासुर के अंत के बाद शिवजी यहां ठहरे थे।
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में लैंसडौन से करीब 36 किलोमीटर दूर स्थित श्री तारकेश्वर महादेव मंदिर (ताड़केश्वर धाम) देवदार और चीड़ के घने जंगलों के बीच समुद्र तल से लगभग 1,800 मीटर की ऊंचाई पर बसा एक प्राचीन और सिद्ध पीठ है।
ऐसी मान्यता है कि मंदिर के आसपास के 84 गांवों के लोग साल की पहली फसल भगवान महादेव को भेंट के रूप में अर्पित करते हैं। मंदिर की भव्यता और इससे जुड़ी कहानी को विस्तार से जानने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।
मंगलवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मंदिर की भव्यता पर बात की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर से जुड़ा खास वीडियो पोस्ट कर लिखा, “पौड़ी गढ़वाल जिले के घने देवदार के जंगलों के बीच बसा श्री तारकेश्वर महादेव मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत माहौल और आध्यात्मिक माहौल के लिए मशहूर है। भगवान शिव को समर्पित यह पवित्र जगह भक्तों को आध्यात्मिक शांति और दिव्य अनुभव देती है। श्रावण के महीने में यहां खास पूजा और रीति-रिवाज किए जाते हैं। पौड़ी गढ़वाल की अपनी यात्रा के दौरान श्री तारकेश्वर महादेव के दर्शन जरूर करें।”
यह मंदिर सड़क से करीब 300 मीटर नीचे जंगल की गहराई में स्थित है। मंदिर के आसपास देवदार के विशाल पेड़ हैं, जिनका प्राकृतिक विन्यास पवित्र प्रतीक “ॐ” जैसा प्रतीत होता है।
यह मंदिर लगभग 1,500 साल पुराना माना जाता है और इस स्थान का नाम तारकासुर राक्षस से जुड़ा है, जिसने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए यहां कठोर तपस्या की थी। मान्यता है कि भगवान शिव की तांडव मुद्रा वाली प्रतिमा यहां स्थापित है और मुख्य शिवलिंग उसी के नीचे स्थित है।



