Tuesday, August 25, 2026
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महाराष्ट्र : भूख हड़ताल कर रहे आदिवासी छात्रों की आवाज उठाने पर रोहित पवार ने राहुल का जताया आभार

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मुंबई, 25 अगस्त (आईएएनएस)। पुणे के बारामती से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) विधायक रोहित पवार ने भूख हड़ताल पर बैठे महाराष्ट्र के आदिवासी छात्रों की आवाज उठाने और मुख्यमंत्री को पत्र लिखने पर आभार जताया है। रोहित पवार ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, “राहुल गांधी, आपने इस अत्यंत महत्वपूर्ण विषय में व्यक्तिगत रूप से ध्यान दिया, इसके लिए आपका हृदय से आभार।”

रोहित पवार ने कहा, “आदिवासी छात्रों का यह मुद्दा बेहद गंभीर और संवेदनशील है। दुर्भाग्य की बात है कि कल (सोमवार) हुई महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक में इस विषय पर चर्चा तक नहीं हुई। आदिवासी मंत्री के साथ हुई छात्रों की बैठक में भी कुछ हल नहीं निकला। इससे साफ होता है कि सरकार आदिवासी छात्रों की न्यायसंगत मांगें और उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर नहीं है।”

रोहित पवार ने कहा, “इसीलिए आने वाले कुछ दिनों में इन छात्रों द्वारा एक बड़े जनआंदोलन का आयोजन किए जाने की संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो इस आंदोलन में आपकी (राहुल गांधी) भी उपस्थिति रहे, ऐसी इन छात्रों की इच्छा है। आपकी उपस्थिति से इस संवेदनहीन सरकार पर निश्चित रूप से बड़ा दबाव बनेगा और सरकार को पीछे हटकर छात्रों की न्यायसंगत मांगों को स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। इसलिए आप इस विषय पर निश्चित रूप से सकारात्मक रूप से विचार करें और छात्रों के इस संघर्ष में उनके साथ खड़े रहें, यह विनम्र अनुरोध है।”

दरअसल, राहुल गांधी ने सोमवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा था। पत्र में राहुल गांधी ने लिखा, “पूरे महाराष्ट्र के आदिवासी छात्र दस दिनों से ज़्यादा समय से भूख हड़ताल पर हैं। पुणे में उन्होंने मुझे उन नियमों के बारे में बताया जो उनसे उनका सम्मान छीनते हैं और शिक्षा का रास्ता बंद करते हैं। कई आदिवासी छात्र दूर-दराज़ के गांवों से आते हैं और शहरों में पढ़ाई करने के लिए सरकारी हॉस्टलों पर निर्भर रहते हैं। एक नया नियम 30 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को इन हॉस्टलों में रहने से रोकता है, जिससे वे कई छात्र बाहर हो जाते हैं जो अभी भी अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं या परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।”

राहुल गांधी ने कहा, “हॉस्टल असुरक्षित हैं और अक्सर वहां भोजन, साफ-सफ़ाई और चिकित्सा सुविधाओं की कमी होती है। छात्रों को चोटें आई हैं और मौतें भी हुई हैं, जिनमें सांप के काटने से हुई मौतें भी शामिल हैं। महिलाओं के लिए सुविधाएं और भी खराब हैं। मुझे यह जानकर हैरानी हुई कि लंबे समय तक बाहर रहने के बाद लौटने वाली छात्राओं को अपनी “फिटनेस” साबित करने के लिए प्रेग्नेंसी टेस्ट और कई अन्य मेडिकल टेस्ट से गुजरना पड़ता है। यह एक अपमानजनक प्रक्रिया है जो उन्हें तब तक दोषी मानती है जब तक वे खुद को निर्दोष साबित न कर दें। यह नियम उनके सम्मान और उनकी मानवीय गरिमा पर हमला है।”

राहुल गांधी ने कहा, “ये छात्र कोई खैरात नहीं मांग रहे हैं। वे अपना हक मांग रहे हैं। सरकार की बात सुनने के लिए उन्हें अपनी सेहत जोखिम में नहीं डालनी चाहिए। इसलिए मेरा आपसे (मुख्यमंत्री) अनुरोध है कि आप विरोध कर रहे आदिवासी छात्रों के प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत रूप से मिलें, उनकी बात सुनें और उनकी समस्याओं का तुरंत समाधान करें।”