Tuesday, August 25, 2026
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यूपीआई ने खत्म की छुट्टे पैसों की टेंशन, दुकानदार बोले- जिंदगी का हिस्सा बना डिजिटल पेमेंट

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नई दिल्ली, 25 अगस्त (आईएएनएस)। पिछले एक दशक में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने भारत के डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में बड़ा बदलाव किया है। कभी नकद भुगतान और छुट्टे पैसों पर निर्भर रहने वाले बाजारों में अब मोबाइल फोन से कुछ ही सेकंड में भुगतान करना आम बात हो गई है। किराना दुकान से लेकर सब्जी वाले, दूध विक्रेता, रिक्शा चालक और बड़े कारोबारी तक डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल कर रहे हैं। छोटे से छोटे भुगतान के लिए भी लोग अब नकदी रखने के बजाय यूपीआई को प्राथमिकता दे रहे हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2016-17 में यूपीआई के जरिए करीब 2 करोड़ लेन-देन हुए थे। यह संख्या बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 24,000 करोड़ से अधिक लेन-देन तक पहुंच गई। इसी अवधि में यूपीआई लेन-देन का मूल्य करीब 0.07 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 314 लाख करोड़ रुपए हो गया। भारत में डिजिटल भुगतान के तेजी से विस्तार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया में होने वाले हर दो रियल-टाइम डिजिटल लेन-देन में से एक भारत में होता है।

जुलाई 2026 में ही यूपीआई पर 2,360 करोड़ से अधिक लेन-देन दर्ज किए गए। खास बात यह है कि यूपीआई का इस्तेमाल केवल बड़े भुगतान तक सीमित नहीं है। छोटे और रोजमर्रा के भुगतान भी तेजी से डिजिटल हो रहे हैं। 86 प्रतिशत यूपीआई मर्चेंट भुगतान 500 रुपए से कम के हैं। देश के कुल डिजिटल भुगतान में यूपीआई की हिस्सेदारी करीब 84 प्रतिशत बताई गई है।

दुकानदार नंद लाल ने आईएएनएस को बताया कि यूपीआई ने कारोबार में बड़ा बदलाव किया है। अब ग्राहकों को भुगतान करने में काफी आसानी होती है। ग्राहक क्यूआर कोड स्कैन करता है और कुछ ही समय में भुगतान हो जाता है। भुगतान की रिसीविंग भी तुरंत मिल जाती है। पहले ग्राहकों और दुकानदारों दोनों के सामने छुट्टे पैसों की समस्या रहती थी। किसी के पास छुट्टे नहीं होते थे तो किसी को एक-दो रुपए लौटाने में परेशानी होती थी। यूपीआई आने के बाद यह समस्या लगभग खत्म हो गई है। अब कोई व्यक्ति एक रुपए की खरीदारी करता है तो उसका भुगतान भी यूपीआई के जरिए किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि लोगों को अब कैश साथ लेकर चलने की जरूरत कम हो गई है। रिक्शे वाले को भुगतान करना हो, सब्जी खरीदनी हो या दूध वाले को पैसे देने हों, मोबाइल से तत्काल भुगतान किया जा सकता है। इससे भुगतान का तरीका आसान और सुविधाजनक हुआ है।

संतोष कुमार झा ने बताया कि डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन से सबसे बड़ा फायदा छुट्टे पैसों की समस्या खत्म होने के रूप में हुआ है। कारोबार में करीब 50 प्रतिशत तक बदलाव महसूस किया जा सकता है और डिजिटल भुगतान से काफी मदद मिलती है। आज के समय में चाहे कोई व्यक्ति 10,000 रुपए कमाता हो या एक लाख रुपए, लगभग हर आय वर्ग के लोग यूपीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। कोई 500 रुपए का भुगतान कर रहा है तो कोई 5 रुपए का, लेकिन डिजिटल भुगतान की सुविधा अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है।

दुकानदार अभिषेक ने यूपीआई के फायदे के साथ इससे जुड़ी कुछ चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यूपीआई आने के बाद भुगतान आसान हुआ है, लेकिन अब कारोबारी और ग्राहक दोनों ही डिजिटल भुगतान पर काफी हद तक निर्भर हो गए हैं। पहले कारोबार में नकदी का इस्तेमाल ज्यादा होता था, लेकिन अब छोटी-छोटी खरीदारी और भुगतान भी यूपीआई से होने लगे हैं। इससे बैंकिंग लेन-देन बढ़ा है और कारोबार के लगभग हर छोटे-बड़े भुगतान का डिजिटल रिकॉर्ड भी बन जाता है।

उन्होंने कहा कि छुट्टे पैसों की समस्या पहले के मुकाबले काफी कम हो गई है। वहीं, अगर किसी समय दुकान या कारोबारी के पास नकदी कम पड़ जाए तो यूपीआई के जरिए तत्काल भुगतान किया जा सकता है। इस लिहाज से डिजिटल भुगतान कारोबार के लिए काफी सुविधाजनक साबित हुआ है। अभिषेक ने आगे कहा कि छोटे व्यापारियों के लिए रोजाना के कारोबार में तत्काल नकदी की जरूरत होती है। कई मामलों में भुगतान के बैंक खाते में सेटलमेंट होने में समय लग सकता है। ऐसे में छोटे व्यापारी को अगले भुगतान या सामान की खरीद के लिए तुरंत पैसे की आवश्यकता होती है।

अभिषेक ने यह भी कहा कि बड़े कारोबारियों के लिए डिजिटल लेन-देन और बैंकिंग व्यवस्था को संभालना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है, लेकिन छोटे व्यापारियों के लिए रोजमर्रा के कैश फ्लो को बनाए रखना अभी भी चुनौती है। उन्हें एक तरफ ग्राहकों से डिजिटल भुगतान स्वीकार करना पड़ता है तो दूसरी तरफ सामान खरीदने और अन्य खर्चों के लिए तत्काल भुगतान की जरूरत होती है।