नई दिल्ली, 26 अगस्त (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।
27 अगस्त 2026 (गुरुवार) को श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि सुबह 9:09 बजे तक रहेगी। इसके बाद पूर्णिमा शुरू हो जाएगी। सुबह 9:09 के बाद पूर्णिमा के अवसर पर भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा करना सबसे अधिक फलदायी माना गया है। इस दिन हयग्रीव जयंती भी है, इसलिए विद्या, बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति के लिए भगवान विष्णु के हयग्रीव अवतार की आराधना करना अत्यंत श्रेष्ठ है।
गुरुवार को सुबह 6:11 बजे सूर्योदय और शाम 6:45 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, शाम 6:22 बजे चंद्रोदय और अगले दिन तड़के 6:02 बजे चंद्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार, 27 अगस्त 2026 को सूर्य मघा नक्षत्र में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा धनिष्ठा रहेगा।
गुरुवार को हर्षण योग नहीं रहेगा; इस दिन मुख्य रूप से शोभन योग (सुबह 07:54 बजे तक) और उसके बाद अतिगंड योग रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:03 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। अमृत काल दोपहर 3:12 से 4:54 बजे तक रहेगा।
वहीं, राहुकाल दोपहर 2:02 बजे से 3:37 बजे और गुलिक काल सुबह 9:19 से 10:54 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, यमगंड काल सुबह 6:11 से 7:45 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए, क्योंकि इन्हें अशुभ समय माना जाता है।
गुरुवार को इस दिन सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा मकर राशि में स्थित रहेगा। दक्षिण दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना अनिवार्य हो, तो कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।
