नई दिल्ली, 26 अगस्त (आईएएनएस)। पायलटों और क्रू मेंबर्स के शरीर में साइकोएक्टिव ड्रग्स (गांजा/मैरिजुआना, एम्फैटेमिन, कोकीन, ओपिएट्स आदि) की मौजूदगी का पता लगाने वाले मोका डोप टेस्ट सिस्टम और सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (सीएआर) में जरूरी बदलावों पर हाई-लेवल मीटिंग की गई। एयरलाइंस के साथ बातचीत की जानकारी सिविल एविएशन मिनिस्ट्री को दी जा रही है।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू की ओर से नए डोप टेस्ट सिस्टम पर विचार करने के लिए एविएशन के बड़े अधिकारियों और स्टेकहोल्डर्स के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग की अध्यक्षता की गई। इस मीटिंग में डीजी, डीजीसीए, मोका सेक्रेटरी और एयरलाइन ऑपरेटर्स के प्रतिनिधि शामिल थे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, स्टेकहोल्डर्स यानी एयरलाइन ऑपरेटर्स के साथ बातचीत की जा रही है।
इस बैठक में सभी पायलट्स का साल में एक बार 100 प्रतिशत डोप टेस्ट करने के प्रस्ताव को लागू करने से जुड़े कई पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। यह एक अहम चरण है क्योंकि जब सीएआर को फिर से ड्राफ्ट किया जाएगा, तो इन सुझावों को उसमें शामिल किया जा सकता है।
बता दें कि डीजीसीए के पास सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (सीएआर) को फिर से ड्राफ्ट करने का अधिकार है, जिसमें पायलट्स के लिए डोप टेस्ट या साइकोएक्टिव सब्सटेंस टेस्टिंग का फ्रेमवर्क शामिल है।
बीते दिन केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राममोहन नायडू ने कहा था, “नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) सभी पक्षकारों से हर पायलट का साल में एक बार डोप टेस्ट कराने पर विचार कर रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा था, “अभी नियम के मुताबिक पूरे पायलट नेटवर्क में 10 प्रतिशत का प्रावधान है।”
उन्होंने आगे कहा था, “रेगुलेटर कोई अंतिम फैसला लेने से पहले टेस्टिंग के दायरे को बढ़ाने से होने वाले सुरक्षा संबंधी फायदों और कामकाज पर पड़ने वाले असर की जांच कर रहा है।
बता दें कि यह प्रस्ताव इस महीने की शुरुआत में एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान की घटना के बाद पायलटों के लिए नशीले पदार्थों के इस्तेमाल से जुड़े नियमों की कड़ी जांच के बीच आया है। नायडू ने कहा कि नियमों को मजबूत करने पर बातचीत और घटना की चल रही जांच से अलग की जा रही है।
