रांची, 26 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर जेएसएससी के प्रभारी अध्यक्ष एवं राज्य के वित्त सचिव प्रशांत कुमार को परीक्षा सुधार समिति से तत्काल हटाने और उनकी भूमिका की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। इसे लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। पत्र में नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि कि जिस अधिकारी के कार्यकाल में जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को लेकर गंभीर विवाद सामने आए, उन्हें ही परीक्षा व्यवस्था में सुधार की जिम्मेदारी देना हितों के टकराव का मामला है।
पत्र के अनुसार, झारखंड की भर्ती परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं के बाद सरकार ने परीक्षा सुधार समिति का गठन किया है। लेकिन फरवरी 2024 से जेएसएससी के अध्यक्ष पद पर रहे प्रशांत कुमार को ही समिति में शामिल करना दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक है। उन्होंने कहा कि सितंबर 2024 की विवादित जेएसएससी सीजीएल परीक्षा प्रशांत कुमार के कार्यकाल में हुई थी। परीक्षा रद्द करनी पड़ी, जेएसएससी कार्यालय में छापेमारी हुई और आयोग के सचिव से पूछताछ हुई। इससे पूरी परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए।
उन्होंने कहा कि ऐसे में जिस अधिकारी की भूमिका की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, उसे ही व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी देना उचित नहीं है। नेता प्रतिपक्ष ने पत्र में प्रशांत कुमार के प्रशासनिक आचरण को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि वित्त सचिव रहते हुए राज्य के खातों में हजारों करोड़ रुपये के अंतर को लेकर विभाग की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।
उन्होंने जल संसाधन विभाग से जुड़े एक मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें उनके अनुसार झारखंड हाईकोर्ट ने अदालत को गुमराह करने और आदेश का पालन नहीं करने को लेकर जुर्माना लगाया था। मरांडी ने कहा कि इन परिस्थितियों के बावजूद प्रशांत कुमार को परीक्षा सुधार समिति में शामिल करना सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में सुधार के लिए गठित समिति में ऐसे अधिकारियों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए, जिनकी भूमिका खुद जांच के दायरे में हो सकती है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा से संबंधित एजेंसी चयन, प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा संचालन, परिणाम प्रक्रिया और सभी प्रशासनिक अनुमोदनों में प्रशांत कुमार की भूमिका की जांच होनी चाहिए। उन्होंने परीक्षा सुधार समिति में निष्पक्ष न्यायिक, तकनीकी और शैक्षणिक विशेषज्ञों के साथ छात्र प्रतिनिधियों को भी शामिल करने का सुझाव दिया।
उन्होंने जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं की जांच सीबीआई से कराने की मांग करते हुए कहा कि इससे छात्रों का विश्वास बहाल किया जा सकता है। मरांडी ने कहा कि परीक्षा सुधार समिति व्यवस्था को शुद्ध करने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए बनाई गई है, संदिग्ध भूमिका वाले अधिकारियों को संरक्षण देने के लिए नहीं।
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