बेंगलुरु, 26 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक के डिप्टी सीएम और रेवेन्यू मिनिस्टर जी. परमेश्वर ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार सूखे की स्थिति का पूरा आकलन कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार जमीनी हकीकत की रिपोर्ट की जांच के बाद अगली कैबिनेट बैठक में 102 तालुकों में सूखे का ऐलान कर सकती है।
बेंगलुरु में अपने घर के पास पत्रकारों से बात करते हुए परमेश्वर ने कहा कि सरकार को 102 तालुकों से जमीनी हकीकत की रिपोर्ट मिली है और वह अगली कैबिनेट बैठक में उन पर चर्चा करेगी।
उन्होंने कहा कि हम केंद्र द्वारा तय किए गए मानदंडों के अनुसार सूखे का ऐलान करेंगे। हम हर हफ्ते सूखे की स्थिति की समीक्षा करेंगे।
परमेश्वर ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी सूखे की स्थिति का आकलन करने के लिए टीमें बनाई थीं, लेकिन न तो उन्होंने विधानसभा में अपनी रिपोर्ट पर चर्चा की और न ही मुख्यमंत्री या रेवेन्यू मिनिस्टर को कोई रिपोर्ट या ज्ञापन सौंपा।
उन्होंने कहा कि राज्य में पीने के पानी की कमी है और किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं। विपक्ष को इन मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए और सुझाव देने चाहिए। इसके बजाय, वे विधानसभा में राजनीति करते रहे।
पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के उस बयान पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कि उन्होंने कांग्रेस आलाकमान से परमेश्वर को डिप्टी सीएम बनाने का आग्रह किया था, परमेश्वर ने कहा कि यह बयान सच है।
परमेश्वर ने कहा कि जब सिद्धारमैया ने इस्तीफा दिया था, तो उन्होंने कहा था कि परमेश्वर को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। आलाकमान ने इस पर विचार नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा था कि मुझे डिप्टी सीएम बनाया जाना चाहिए।
मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की संभावना के बारे में पूछे गए सवालों पर परमेश्वर ने कहा कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बुधवार या गुरुवार को दिल्ली जाने की संभावना है और अगर वे कांग्रेस आलाकमान से मिलते हैं तो इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है।
उन्होंने कैबिनेट में फेरबदल की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कोई भी फैसला आलाकमान पर निर्भर करेगा।
उन्होंने कहा कि किसी भी चार्जशीट में नागेंद्र का नाम नहीं है। मैं गृह मंत्री रह चुका हूं और मुझे इस बारे में जानकारी है। इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए या नहीं, इस पर फैसला कैबिनेट में चर्चा के बाद लिया जाएगा।
परमेश्वर ने इस मुद्दे पर पदयात्रा निकालकर राजनीतिक हथकंडे अपनाने के भाजपा पर भी आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि हमने कहा था कि हम विधानसभा में सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। वे अब विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।
पार्क की जमीन के पांच प्रतिशत हिस्से के प्रस्तावित इस्तेमाल के विरोध पर परमेश्वर ने कहा कि जमीन का इस्तेमाल सार्वजनिक कार्यों के लिए किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जब कॉरपोरेशन इस मामले पर कोई ठोस फैसला लेगा, तब स्थिति साफ हो जाएगी।
सड़क के किनारे खड़ी गाड़ियों के लिए शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर परमेश्वर ने कहा कि जब वे बेंगलुरु के प्रभारी मंत्री थे, तब भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी।
उन्होंने कहा कि सड़कें लोगों के आने-जाने के लिए होती हैं। अगर दोनों तरफ गाड़ियां खड़ी हों, तो सड़कें ही दिखाई नहीं देतीं। इस मुद्दे पर बातचीत चल रही है और फैसला बाद में पता चलेगा।
पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस बयान पर कि असमानता को खत्म करने के लिए आरक्षण और आंतरिक आरक्षण जरूरी हैं, परमेश्वर ने कहा कि राज्य सरकार पहले ही आंतरिक आरक्षण लागू कर चुकी है।
उन्होंने कहा कि आंतरिक आरक्षण अब एक तय मामला है। हमारी सरकार ने कई सालों तक चले संघर्ष के बाद आंतरिक आरक्षण लागू किया।
