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आज भारत की बेटियां फाइटर एयरक्राफ्ट में बैठकर देश की रक्षा कर रहीं: राजनाथ सिंह

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नई दिल्ली, 26 अगस्त (आईएएनएस)। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि जिस भारत की बेटियां कभी स्वतंत्रता के लिए सत्याग्रह की अग्रिम पंक्ति में खड़ी थीं, आज उसी भारत की बेटियां फाइटर एयरक्राफ्ट की कॉकपिट में बैठकर, देश के आसमान की रक्षा कर रही हैं। यह केवल परिवर्तन की कहानी नहीं है, यह नए भारत की शक्ति की कहानी है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को गोवा में हुतात्मा स्मृति स्मारक के उद्घाटन समारोह में यह बात कही। उन्होंने कहा कि आज हमारी बेटियां सैन्य बलों में लीडरशिप रोल निभा रही हैं, स्पेस मिशन का हिस्सा बन रही हैं, स्टार्टअप शुरू कर रही हैं और देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही हैं। ये सारी चीजें, उन सपनों का प्रतिबिंब है, जिसे हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था।

रक्षा मंत्री ने कहा, “आज भारत लड़ाकू विमान से लेकर वॉरशिप, मिसाइल, राडार, ड्रोन और एडवांस डिफेंस सिस्टम तक अनेक क्षेत्रों में अपनी स्वदेशी क्षमता को बढ़ा रहा है। आज भारत हथियारों का खरीदार न रहकर, ग्लोबल डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग का महत्वपूर्ण निर्यातक बन रहा है। आज हमारी सेना अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी को अपना रही है। हमारी नौसेना ब्लू वॉटर से लेकर रणनीतिक समुद्री सुरक्षा स्पेस तक भारत के हितों की रक्षा कर रही है। हमारी एयरफोर्स हमारे आसमानों की सुरक्षा कर रही है और तीनों सेनाएं संयुक्ता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।”

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के नागरिक के रूप में हमारी जिम्मेदारी है। यह बात विशेषकर हमारे युवाओं के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने हमें एक जिम्मेदारी भी दी है, कि हम देश की यूनिटी को मजबूत करें, संवैधानिक मूल्यों का सम्मान करें, कानून का पालन करें। उन्होंने कहा कि गोवा की मुक्ति भारत की अखंडता और स्वाभिमान की पुनर्स्थापना थी। 19 दिसंबर 1961 को, गोवा अंतत पुर्तगाली शासन से मुक्त हुआ। यह उन सत्याग्रहियों के बलिदान के बिना संभव नहीं था, जिन्होंने वर्षों पहले पत्रादेवी जैसे स्थानों पर अपने प्राणों की आहुति दी थी। 1961 में हमारी सेनाओं ने, कुछ ही समय के भीतर जिस पराक्रम का परिचय दिया, वह देश ही नहीं बल्कि दुनिया के सैन्य इतिहास में एक नजीर बन गया।

गोवा मुक्ति दिवस केवल अतीत के सैन्य पराक्रम को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह हमें याद दिलाता है कि भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए हमारी सेनाएं सदैव सजग, सक्षम और तैयार रहनी चाहिए।

राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारी सेनाओं ने जिस आत्मविश्वास के साथ अपने दायित्व का निर्वहन किया, वही परंपरा आज अत्याधुनिक और आत्मनिर्भर सेनाओं के रूप में आगे बढ़ रही है। ऑपरेशन सिंदूर इसका एक बड़ा उदाहरण दुनिया के सामने मौजूद है। उन्होंने कहा कि हमारे स्वतन्त्रता सेनानियों ने हमें आजादी तो दिला दी, लेकिन उस आजादी का सम्मान करना हमारी जिम्मेदारी भी है। आजादी का अर्थ केवल यह नहीं है कि हम स्वतंत्र रूप से अपनी बात कह सकें। आजादी का अर्थ यह भी है कि हम अपनी स्वतंत्रता के साथ अपनी जिम्मेदारियों को समझें।

राजनाथ सिंह ने कहा, “एक रक्षा मंत्री के रूप में मुझे यह कहते हुए हर्ष और गौरव की अनुभूति होती है कि भारतीय सशस्त्र बलों ने जिस प्रोफेशनलिजम और बहादुरी, व अनुशासन के साथ, गोवा की मुक्ति के अभियान को सफल बनाया, वह भारतीय सैन्य इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

उन्होंने कहा, “आज के भारत में, जब हम क्षेत्रवाद, सम्प्रदायवाद और जातिवाद पर बहस करते हैं, तो हमें यह ध्यान रखना होगा कि इन सब संक्रीण मानसिकता वाले विचारों से ऊपर, एक भावना है, जो सबसे महत्वपूर्ण है, वह है हमारी राष्ट्रीय एकता। पत्रादेवी का इतिहास हमें इसी एकता का सबसे मजबूत सबक देता है। गोवा की जनता ने औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध आवाज उठाने का कार्य किया। गोवा की स्वतंत्रता का संघर्ष गोवा की सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, यह पूरे देश के लोगों की जिम्मेदारी बन गया। भारत के विभिन्न भागों से,अनेक समूहों ने गोवा की ओर शांतिपूर्ण सत्याग्रह करने के लिए कूच किया।”

उन्होंने कहा कि पत्रादेवी का यह शहीद स्मारक, उस अमर बलिदान की स्मृति का प्रतीक है, जिसने भारत की आजादी के अंतिम अध्याय को अपने रक्त से लिखा। यह वह तीर्थ है जहां भारत के विभिन्न कोनों से आए वीरों ने अपने प्राणों की आहुति देकर यह सिद्ध कर दिया कि भारत एक जीता-जागता राष्ट्र है।