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मध्यप्रदेश: कांग्रेस ने स्कूली शिक्षा के प्रदर्शन पर सवाल उठाए और कहा- किसी भी जिले ने 60 प्रतिशत का आंकड़ा पार नहीं किया

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भोपाल, 29 अगस्त (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने राज्य सरकार के स्कूली शिक्षा के प्रदर्शन पर सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के ‘परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स फॉर डिस्ट्रिक्ट्स’ 2025-26 में राज्य का कोई भी जिला 60 प्रतिशत का आंकड़ा पार नहीं कर पाया।

राज्य कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शनिवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखे एक पत्र में कहा कि इस मूल्यांकन में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले जिले को 600 में से 333 अंक, यानी 55.5 प्रतिशत अंक मिले।

पटवारी ने कहा, “इस रिपोर्ट में मध्य प्रदेश की स्थिति को आपकी सरकार की शिक्षा व्यवस्था का एक गंभीर रिपोर्ट कार्ड माना जाना चाहिए। मध्य प्रदेश का एक भी जिला 60 प्रतिशत का आंकड़ा पार नहीं कर पाया है।”

‘परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स फॉर डिस्ट्रिक्ट्स’ ने देश भर के 784 जिलों में स्कूली शिक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन 70 पैमानों पर किया, जिनमें सीखने के नतीजे (लर्निंग आउटकम), बुनियादी ढांचा, स्कूल सुरक्षा और बच्चों की सुरक्षा, डिजिटल लर्निंग और गवर्नेंस शामिल हैं। पटवारी ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में कमियों को उजागर करने के लिए कई जिलों के प्रदर्शन का हवाला दिया।

उन्होंने कहा कि भोपाल को सीखने के नतीजों में लगभग 47 प्रतिशत और स्कूल सुरक्षा में 37 प्रतिशत अंक मिले, जबकि इंदौर ने स्कूल सुविधाओं में लगभग 41 प्रतिशत और सीखने के नतीजों में 47 प्रतिशत अंक हासिल किए।

उन्होंने कहा कि कई जिलों में डिजिटल लर्निंग का स्तर विशेष रूप से कमजोर था। इस पैमाने पर सागर को लगभग 24 प्रतिशत, बड़वानी को 16 प्रतिशत, आगर-मालवा को 28 प्रतिशत और धार को 20 प्रतिशत अंक मिले।

पटवारी ने कहा, “ये आंकड़े कांग्रेस के किसी सर्वे से नहीं आए हैं। ये केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की मूल्यांकन प्रणाली पर आधारित हैं।”

उन्होंने पीजीआई-डी नतीजों की जिला-वार सार्वजनिक समीक्षा और सीखने के नतीजों को बेहतर बनाने के लिए समय-सीमा वाली योजनाओं की मांग की। राज्य कांग्रेस प्रमुख ने उन जिलों में डिजिटल संसाधनों, इंटरनेट कनेक्टिविटी, स्मार्ट क्लास और शिक्षकों के प्रशिक्षण के ऑडिट की भी मांग की, जहां डिजिटल लर्निंग स्कोर 30 प्रतिशत से कम है।

पटवारी ने स्कूल सुरक्षा और बच्चों की सुरक्षा के मामले में खराब प्रदर्शन करने वाले जिलों में सुरक्षा ऑडिट और मुख्यमंत्री स्तर पर सीखने के नतीजों की तिमाही समीक्षा की भी मांग की।

उन्होंने पत्र में लिखा, “मध्य प्रदेश में बच्चों का भविष्य राजनीतिक प्रचार का विषय नहीं है। सरकार आप चला रहे हैं, इसलिए जवाब आपको ही देना होगा।”