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नक्सली मुक्त बालाघाट के बोंदारी और कोरका गांव में आजादी के बाद पहली बार पहुंचे सीएम मोहन यादव

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बालाघाट, 29 अगस्त (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के नक्सली मुक्त हुए बालाघाट जिले के बोंदारी और कोरका गांवों का नजर जुड़ा था, क्योंकि आजादी के बाद पहला ऐसा मौका था जब कोई मुख्यमंत्री उनके बीच पहुंचा हो। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस गांव में लोगों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याएं की सुनीं।

सीएम मोहन यादव शनिवार को बालाघाट जिले के दूरस्थ गांव बोंदारी और कोरका पहुंचे। उन्‍होंने पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे इस बोंदारी गांव में ग्रामवासियों से संवाद किया। मुख्यमंत्री ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठे, जनजातीय समाज की समस्याएं सुनीं और उन्हें मौके पर ही हल किया।

उन्होंने पशुपालन में बढ़ावा, आवास सुविधा, पोषण आहार के उपयोग की आदत विकसित करने के लिए जन जागृति अभियान, वन विभाग के सहयोग, चिकित्सा, शिक्षा, रोजगार के अवसर बढ़ाने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की।

दरअसल इतिहास में पहली बार कोई मुख्यमंत्री बालाघाट जिले के नक्सल प्रभावित रहे बोंदारी और कोरका गांवों में ग्रामवासियों से मिलने पहुंचे। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि सरकार का स्पष्ट संकल्प ‘सुरक्षा के साथ विकास और विकास के साथ रोजगार’ का है। नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त हुए क्षेत्रों में अब सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्व-रोजगार के अवसरों का विस्तार किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि 225 करोड़ रुपये की विकास पहल के अंतर्गत पंचायत एवं ग्रामीण विकास, ऊर्जा, शिक्षा, उद्योग, महिला एवं बाल विकास, आयुष, खाद्य, मत्स्य, स्वास्थ्य, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी, जनजातीय कार्य एवं पर्यटन सहित विभिन्न विभागों के माध्यम से अधोसंरचना विस्तार सहित सामाजिक एवं आर्थिक विकास के सभी कार्य किए जाएंगे।

सीएम यादव ने कहा कि सरकार का लक्ष्य अब केवल सड़क बनाने का ही नहीं, बल्कि सड़कों को बाजार से, गांव को रोजगार से और युवाओं को अवसरों से जोड़ने का है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का प्रयास रहेगा कि गांव में तैयार होने वाले उत्पादों का स्थानीय स्तर पर ही मूल्य संवर्धन हो और उन्हें देश के बड़े बाजारों तक आसानी से पहुंचाया जा सके।

उन्होंने कहा कि महिलाओं और स्व-सहायता समूहों को आर्थिक गतिविधियों और छोटे उद्यमों से जोड़कर परिवारों की आय बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। यहां के युवाओं को नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला स्व-उद्यमी और उद्योगपति बनाने के लिए कौशल, प्रशिक्षण और उद्यमिता के अवसर बढ़ाए जाएंगे।