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नेपाल और भारत के पारगमन स्थलों पर 45 यात्रियों के सुरक्षित होने की पुष्टि हो चुकी है: वीडी सतीशन

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नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने शनिवार को नेपाल में अचानक आई बाढ़ को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। उन्होंने कहा कि कोच्चि से आए 14 सदस्यीय दल, श्रुति शिखामणि (कक्कनाड) और रिनीत मोहन (पिरावोम) सहित 16 केरलवासी सुरक्षित घर लौट आए हैं।

मुख्यमंत्री सतीशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि नेपाल और भारत के पारगमन स्थलों पर 45 यात्रियों के सुरक्षित होने की पुष्टि हो चुकी है और उनकी वापसी की व्यवस्था की जा रही है।

उन्होंने कहा कि 7 व्यक्तियों से अभी संपर्क करना बाकी है (जिनमें केरल मूल के 4 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक शामिल हैं)। उनके बारे में जानकारी जुटाने के लिए

विदेश मंत्रालय से सक्रिय रूप से समन्वय किया जा रहा है।

केरल मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देशों के तहत नोरका रूट्स और दिल्ली स्थित एनआरके विकास कार्यालय भारत पहुंचने वाले सभी लोगों के लिए पारगमन और वापसी यात्रा की व्यवस्था करने में लगे हुए हैं।

वहीं, नेपाल में लगातार भारी बारिश और बाढ़ के कारण बिगड़े हालात के बीच अब तक 114 भारतीयों को सुरक्षित बचाया गया है। नेपाल सरकार ने शनिवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि आपदा ग्रस्त इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है।

नेपाल पर्यटन बोर्ड की ओर से एक सूची जारी की गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की गई लिस्ट में 15 देशों के कुल 187 लोगों को बचाए जाने की जानकारी दी गई है। भारत के अलावा इसमें बेल्जियम, बुल्गारिया, जर्मनी, चीन, इटली, माल्टा, ओमान, पुर्तगाल, रूस, दक्षिण कोरिया, स्पेन, स्विजरलैंड, तुर्की और अमेरिका के बचाए गए नागरिक हैं। इसमें सबसे ज्यादा भारत के 114, चीन के 27 और दक्षिण कोरिया के कुल 20 पर्यटक शामिल हैं।

बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं के कारण कई इलाकों में जनजीवन पर असर पड़ा है। नदियों के जलस्तर में वृद्धि, सड़क संपर्क बाधित होने और भूस्खलन के कारण कई स्थानों पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

बचाए गए भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। नेपाल में बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक, तीर्थयात्री, कारोबारी और अन्य नागरिक नियमित रूप से आते-जाते हैं, ऐसे में बाढ़ की स्थिति के दौरान उनकी सुरक्षा भी दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण चिंता बनी हुई है।