SGSU Advertisement
Home राजनीति बिहार में आरक्षण की समीक्षा पर घमासान, संजय झा बोले- मैं ऐसे...

बिहार में आरक्षण की समीक्षा पर घमासान, संजय झा बोले- मैं ऐसे कपों में चाय पी चुका हूं तो मेरी जाति क्या हुई?

0
10

पटना, 30 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार की सियासत में आरक्षण को लेकर बयानबाजी कोई नई बात नहीं है, लेकिन इन दिनों आरक्षण की समीक्षा, अनुसूचित जातियों के भीतर वर्गीकरण और क्रीमी लेयर को लेकर छिड़ी बहस ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। एनडीए के घटक दल हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के बीच शुरू हुआ विवाद अब इस्तीफे की मांग तक पहुंच गया है। इसी बीच जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने बेहद सधे अंदाज में तस्वीर के जरिए विपक्ष पर सवाल खड़ा किया है।

संजय झा ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 10 चाय के कप वाली एक तस्वीर साझा की। तस्वीर के साथ उन्होंने विपक्षी नेताओं से सवाल किया कि क्या वे बता सकते हैं कि इनमें से कौन सा कप किस जाति के लिए है? उन्होंने कहा कि झूठ के पांव नहीं होते और समाज में नफरत फैलाने में जुटे विपक्ष के नेताओं को बताना चाहिए कि तस्वीर में कौन सा कप किस जाति के लोगों के लिए है।

संजय झा ने लिखा कि वह इन सभी कपों में चाय पी चुके हैं, तो फिर उनकी जाति क्या हुई? आरक्षण को लेकर ताजा विवाद की शुरुआत हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन के आरक्षण की समीक्षा और अनुसूचित जातियों के भीतर वर्गीकरण से जुड़े बयान से हुई। इसके बाद केंद्रीय मंत्री और लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। चिराग ने जीतन राम मांझी और उनके बेटे संतोष कुमार सुमन से मंत्री पद से इस्तीफा देने की मांग तक कर दी।

पटना में पत्रकारों से बातचीत में चिराग पासवान ने शनिवार को कहा था कि अनुसूचित वर्ग की सभी जातियां एकजुट हैं, तभी उनकी ताकत बनी हुई है। आरक्षण के भीतर भी बंटवारा किए जाने से पूरे अनुसूचित वर्ग को नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि लोजपा (रामविलास) दलित आरक्षण में सब-कोटा के सख्त खिलाफ है। चिराग ने एससी आरक्षण में क्रीमी लेयर की व्यवस्था को संविधान की भावना के विपरीत बताया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जातियों को सामाजिक भेदभाव और छुआछूत के आधार पर आरक्षण मिला है, न कि आर्थिक आधार पर।

उन्होंने कहा कि यदि जीतन राम मांझी आरक्षण में क्रीमी लेयर या वर्गीकरण के पक्ष में हैं, तो उन्हें पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना चाहिए। साथ ही संतोष कुमार सुमन को भी बिहार सरकार में मंत्री पद छोड़ना चाहिए। चिराग के इस बयान पर जीतन राम मांझी ने भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि वह फिलहाल कई बातें नहीं कहना चाहते और मोतिहारी में होने वाली सभा में इस मुद्दे पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे।

मांझी ने कहा कि संविधान लागू हुए कई दशक बीत गए, लेकिन अनुसूचित जाति की कई जातियां आज भी हाशिए पर हैं। बिहार में अनुसूचित जाति की करीब 22 जातियां हैं, जिनमें कुछ को छोड़कर बाकी को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है। मांझी ने 2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि राज्यों को अनुसूचित जातियों के भीतर वर्गीकरण की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य आरक्षण समाप्त करना नहीं, बल्कि जिन समुदायों को अब तक आरक्षण का पर्याप्त लाभ नहीं मिला है, उन्हें उचित हिस्सेदारी दिलाना है। उन्होंने इस मुद्दे को केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष भी उठाए जाने की बात कही।

मांझी ने चिराग के इस्तीफे की मांग पर पलटवार करते हुए कहा कि इस्तीफा उन्हें खुद देना चाहिए, क्योंकि वह संतोष कुमार सुमन की बात को समझ नहीं रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जातियों के भीतर उचित हिस्सेदारी के लिए वर्गीकरण की मांग को लेकर उनकी पार्टी आगे भी संघर्ष करती रहेगी। इस बीच भीम आर्मी भी अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए ऑनलाइन प्राथमिकी की व्यवस्था और अत्याचार निवारण कानून को और प्रभावी बनाने की मांग को लेकर सड़क पर उतर चुकी है। ऐसे में आरक्षण का मुद्दा बिहार में एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी बहस के केंद्र में आ गया है।