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मोहन भागवत का बयान राजनीतिक मजबूरी नहीं, सनातन की प्रतिबद्धता का प्रतीक: मुख्तार अब्बास नकवी

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नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्रा पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत का बयान समाज में समरसता पैदा करने के लिए है।

भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान का समर्थन करते आईएएनएस से कहा कि उनका भाषण किसी राजनीतिक मजबूरी का परिणाम नहीं बल्कि सनातन मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जब किसी बयान के पीछे राजनीतिक हित नहीं बल्कि सनातनी मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता हो, तो ऐसी बातें देश के भीतर और बाहर लगातार सुनने को मिलेंगी।

उन्होंने कहा कि यदि मोहन भागवत “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः,” “वसुधैव कुटुम्बकम्,” और “विविधता में एकता” जैसे विचारों की बात करते हैं तथा जिस देश में नागरिक रहते हैं, उसके प्रति उनकी प्रतिबद्धता को प्राथमिकता देने की बात करते हैं, तो इसमें किसी को समस्या नहीं होनी चाहिए।

भाजपा नेता ने आरएसएस और भारत को लेकर दशकों से चल रहे कथित पूर्वाग्रहपूर्ण दुष्प्रचार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद आरएसएस की पहचान खत्म नहीं हुई क्योंकि संगठन लगातार राष्ट्र निर्माण और मानवता को संस्कारित एवं समृद्ध करने की दिशा में काम करता रहा है। भारत आज एक धर्मनिरपेक्ष देश है और दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।

बता दें कि ग्रेटर टोरंटो आयोज‍ित कार्यक्रम को संबोध‍ित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि भारतीय मूल के लोगों की जिम्मेदारी केवल अपने रहने वाले देश के प्रति ही नहीं बल्कि पूरी मानवता के प्रति भी है। इस दौरान दो हजार से अध‍िक हिंदुओं और समुदाय के सदस्य उपस्थित हुए।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने दुनिया भर में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों से अपील की है कि वे जिस देश में रहते हैं, वहां के ईमानदार और जिम्मेदार नागरिक बनें। साथ ही, भारत के एकता, सेवा और मानवता के संदेश को भी दुनिया तक पहुंचाएं।

वहीं, उज़्बेकिस्तान द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वोच्च सम्मान दिए जाने पर नकवी ने कहा कि प्रधानमंत्री को दुनिया भर में मिल रहा सम्मान प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रधानमंत्री मोदी का सम्मान नहीं बल्कि पूरे देश और करोड़ों भारतीय नागरिकों का सम्मान है।

नकवी ने कहा कि प्रधानमंत्री को मिले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान को राजनीतिक या सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश उचित नहीं है। उन्होंने इसे भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और देशवासियों के सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि ऐसे अवसरों पर राजनीतिक विवाद खड़ा करने के बजाय देश के सम्मान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।