नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। अच्छी सेहत की शुरुआत हमारी थाली से होती है। हम रोज क्या खाते हैं, कितनी मात्रा में खाते हैं और हमारे भोजन में पोषक तत्वों का कितना संतुलन है। इसका सीधा असर शरीर की ऊर्जा, रोग प्रतिरोधक क्षमता, विकास और लंबे समय तक स्वस्थ रहने पर पड़ता है। यही वजह है कि हर साल 1 से 7 सितंबर तक राष्ट्रीय पोषण सप्ताह मनाया जाता है। इस दौरान लोगों को संतुलित आहार, पोषण और स्वस्थ खानपान की आदतों के प्रति जागरूक किया जाता है।
भारत में राष्ट्रीय पोषण सप्ताह की शुरुआत 1982 में की गई थी। इसका मकसद लोगों को यह समझाना था कि खाना केवल पेट भरने का नाम नहीं है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भोजन में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन, खनिज, फाइबर और पर्याप्त पानी का सही संतुलन होना जरूरी है।
अक्सर हम मान लेते हैं कि घर का बना खाना अपने आप संतुलित और पौष्टिक होता है। लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। अगर किसी भोजन में रोटी या चावल की मात्रा ज्यादा है और दाल, सब्जी, दही या अन्य प्रोटीन स्रोत बहुत कम हैं, तो पेट तो भर सकता है, लेकिन शरीर की सभी पोषण संबंधी जरूरतें पूरी नहीं होतीं। इसीलिए संतुलित थाली में अलग-अलग खाद्य को शामिल करना जरूरी है। अनाज के साथ दाल या कोई अन्य प्रोटीन स्रोत, हरी सब्जियां, मौसमी फल और दूध या दही जैसे खाद्य पदार्थ भोजन को ज्यादा पौष्टिक बना सकते हैं।
हालांकि एक अच्छी और संतुलित थाली के लिए बहुत महंगी चीजों की जरूरत नहीं है। हमारे घरों में आसानी से मिलने वाले खाद्य पदार्थों से ही पौष्टिक भोजन तैयार किया जा सकता है।
अनाज: रोटी, चावल, दलिया, पोहा, उपमा, ओट्स या बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाज भोजन का हिस्सा हो सकते हैं।
प्रोटीन: दाल, राजमा, चना, छोले, सोयाबीन, पनीर, दूध, दही, अंडा, मछली या अन्य उपलब्ध प्रोटीन स्रोत शरीर के लिए जरूरी हैं। खासकर बच्चों, किशोरों और बढ़ती उम्र के लोगों के लिए पर्याप्त प्रोटीन महत्वपूर्ण है।
सब्जियां: भोजन में हरी पत्तेदार और दूसरी रंग-बिरंगी सब्जियों को शामिल करना चाहिए। अलग-अलग रंग की सब्जियां कई तरह के विटामिन, खनिज और अन्य पोषक तत्व उपलब्ध कराती हैं।
फल: मौसमी फल रोज की डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। फल खाने को प्राथमिकता दें और मीठे पेय या ज्यादा चीनी वाले जूस की जगह पूरा फल लेना बेहतर विकल्प हो सकता है।
दूध और दुग्ध उत्पाद: दूध, दही और अन्य डेयरी उत्पाद कैल्शियम और प्रोटीन जैसे पोषक तत्वों के स्रोत हो सकते हैं।
वहीं, आज की व्यस्त जिंदगी में चिप्स, बिस्किट, इंस्टेंट नूडल्स, मिठाइयां, मीठे पेय और दूसरे पैकेज्ड स्नैक्स आसानी से हमारी डाइट का हिस्सा बन जाते हैं। कभी-कभार इनका सेवन अलग बात है, लेकिन इन्हें रोजमर्रा के भोजन का विकल्प बना लेना ठीक नहीं है।
खासकर बच्चों और युवाओं में स्क्रीन टाइम के साथ स्नैकिंग की आदत बढ़ रही है। टीवी या मोबाइल देखते हुए बिना ध्यान दिए ज्यादा खाना भी हमारी कुल कैलोरी बढ़ा सकता है। इसलिए खाने के समय भोजन पर ध्यान देना और पैकेट से सीधे खाने के बजाय उचित मात्रा निकालकर खाने की आदत डालें।
