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शिक्षक संगठन की मांग, जादवपुर यूनिवर्सिटी के पीएचडी एडमिशन में अनियमितताओं की सीबीआई जांच हो

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कोलकाता, 31 अगस्त (आईएएनएस)। शिक्षकों के संगठन ‘अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ’ (एबीआरएसएम) ने पश्चिम बंगाल के कोलकाता में स्थित जादवपुर यूनिवर्सिटी में पीएचडी एडमिशन में अनियमितताओं की स्वतंत्र सीबीआई जांच की मांग की है।

सोमवार को उन्होंने इस मामले में जादवपुर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर को एक ज्ञापन सौंपा। पत्र की एक कॉपी में लिखा है, “हमें एक ऑडियो रिकॉर्डिंग से पता चला है कि अनुस्तूप चक्रवर्ती का नाम टॉप तीन उम्मीदवारों में शामिल करके जादवपुर यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल रिलेशंस डिपार्टमेंट में पीएचडी प्रोग्राम में एडमिशन दिलाने की कोशिश की गई, जबकि मेरिट लिस्ट में उनकी रैंक 24वीं थी और वे स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) से जुड़े हैं।”

पत्र में कहा गया है, “यह भी गंभीर चिंता का विषय है कि उस ऑडियो बातचीत में बार-बार प्रो. पार्थ प्रतिम रे का नाम आया है, जो सीपीआईएम नेता हैं और बाद में जादवपुर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (जेयूटीए) के प्रेसिडेंट बने। अगर ऑडियो रिकॉर्डिंग असली है और उसमें हुई बातचीत सही है तो यह यूनिवर्सिटी की पीएचडी एडमिशन प्रक्रिया की ईमानदारी और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।”

संगठन ने कहा कि एडमिशन प्रक्रिया को गलत तरीके से प्रभावित करने या उसमें हेरफेर करने की कोई भी कोशिश न केवल मेरिट और निष्पक्षता के सिद्धांतों को कमजोर करेगी, बल्कि जादवपुर यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा और एकेडमिक विश्वसनीयता को भी गंभीर नुकसान पहुंचाएगी।

“इन हालात में एबीआरएसएम की जादवपुर यूनिवर्सिटी यूनिट की ओर से हम सम्मानपूर्वक मांग करते हैं कि यूनिवर्सिटी इन आरोपों की सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) या किसी अन्य उपयुक्त केंद्रीय जांच एजेंसी से स्वतंत्र जांच कराने के लिए तुरंत कदम उठाए, जिसे कानूनी और तथ्यात्मक रूप से सही माना जाए।”

संगठन यह जानना चाहता है कि क्या इंटरनेशनल रिलेशंस डिपार्टमेंट में मेरिट आधारित पीएचडी एडमिशन प्रक्रिया को गलत तरीके से बदलने, प्रभावित करने या उसमें हेरफेर करने की कोई कोशिश की गई थी।

पत्र में लिखा है, “आरोपों की गंभीरता और जादवपुर यूनिवर्सिटी की एकेडमिक ईमानदारी और प्रतिष्ठा पर उनके संभावित असर को देखते हुए, हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आप तुरंत और उचित कदम उठाएं ताकि किसी व्यक्ति को बचाए या निशाना बनाए बिना, एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच के जरिए सच्चाई सामने आ सके। हमें भरोसा है कि यूनिवर्सिटी इस मामले को उतनी ही गंभीरता से लेगी जितनी इसकी जरूरत है और पारदर्शिता, मेरिट, निष्पक्षता और यूनिवर्सिटी की एकेडमिक ईमानदारी बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी।”