नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय मूल की अंतरराष्ट्रीय मॉडल, टेलीविजन होस्ट, लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता पद्मा लक्ष्मी अपनी मेहनत और काबिलियत से आज उस मुकाम पर हैं, जहां उन्हें किसी परिचय की जरूरत नहीं। पद्मा लक्ष्मी का जन्म भारत के चेन्नई में हुआ। हालांकि, वह अमेरिका में पली-बढ़ी और अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर फैशन, फूड और मनोरंजन की दुनिया में एक अलग पहचान बनाई है।
तमिल ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखने वाली पद्मा ने हमेशा अपनी भारतीय जड़ों पर गर्व किया है और वैश्विक मंच पर भारतीय व्यंजनों और संस्कृति को सम्मान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है।
पद्मा लक्ष्मी का जन्म 1 सितंबर 1970 को चेन्नई में हुआ था। उनके पिता वी. लक्ष्मी एक फार्मास्यूटिकल कंपनी में एग्जीक्यूटिव थे और मां विजया लक्ष्मी एक नर्स थीं। माता-पिता के तलाक के बाद पद्मा 4 साल की उम्र में अपनी मां के साथ अमेरिका चली गईं।
बचपन में एक कार दुर्घटना में उनके हाथ पर गहरा निशान बन गया, जिसे उन्होंने बाद में अपनी कमजोरी नहीं बल्कि अपनी ताकत बनाया। क्लार्क यूनिवर्सिटी से थिएटर में ग्रेजुएशन करने के बाद पद्मा ने मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा। वह हेल्मुट न्यूटन, जॉर्जियो अरमानी और राल्फ लॉरेन जैसे दिग्गज डिजाइनरों के लिए काम करने वाली भारतीय मूल की सुपरमॉडलों में से एक बनीं।
तरक्की के रास्ते पर बढ़ती हुई पद्मा को असली वैश्विक पहचान अमेरिका के सबसे लोकप्रिय रियलिटी कुकिंग शो ‘टॉप शेफ’ से मिली। साल 2006 से 2023 तक लगभग 19 सीजन तक उन्होंने इस शो को होस्ट किया। इस शो के लिए उन्हें 9 बार एमी अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया गया।
इस शो ने उन्हें अमेरिका में फूड इंडस्ट्री का सबसे बड़ा चेहरा बना दिया। इसके बाद उन्होंने हुलु पर अपना खुद का शो ‘टेस्ट द नेशन विद पद्मा लक्ष्मी’ शुरू किया, जिसमें उन्होंने अमेरिका में बसे अलग-अलग प्रवासी समुदायों के खाने और उनकी संस्कृति को दिखाया। इस शो को एमी अवॉर्ड मिला।
इसके बाद अगले पड़ाव पर उन्होंने लेखिका और एक्टिविस्ट के रूप में पहचान हासिल की। पद्मा एक सफल लेखिका भी हैं। उनकी किताबों में ‘ईजी एक्सॉटिक’, ‘टैंगी, टार्ट, हॉट एंड स्वीट’ कुकबुक, और संस्मरण ‘लव, लॉस, एंड व्हाट वी एट’ काफी चर्चित रही हैं। उन्होंने बच्चों के लिए ‘टमाटोज फॉर नीला’ नामक किताब भी लिखी है।
एक कार्यकर्ता के तौर पर पद्मा लक्ष्मी महिलाओं के अधिकारों, इमिग्रेंट्स के अधिकारों और बॉडी पॉजिटिविटी के लिए खुलकर बोलती हैं। वह एंडोमेट्रियोसिस जैसी बीमारी को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए सह-संस्थापक के रूप में काम कर रही हैं, जिससे वह खुद भी जूझ चुकी हैं।
