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खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क और मुंद्रा एवं विझिंजम पोर्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट आसपास की अर्थव्यवस्था में लाते हैं बड़ा बदलाव: गौतम अदाणी

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मुंबई, 31 अगस्त (आईएएनएस)। अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने सोमवार को कहा कि खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क और मुंद्रा एवं विझिंजम पोर्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट केवल क्षमता का निर्माण नहीं करते, बल्कि आसपास की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव लाते हैं।

रेटिंग एजेंसी केयरएज ग्रुप के सालाना समिट को संबोधित करते हुए गौतम अदाणी ने कहा, “भारत अब एक बिल्कुल अलग दौर में आ गया है। इन्फ्रास्ट्रक्चर का स्वरूप बदल गया है और भारत जो कुछ भी बना रहा है, उसकी जटिलता के साथ-साथ हमारे रेटिंग फ्रेमवर्क की जटिलता भी विकसित होनी चाहिए।”

अरबपति कारोबारी ने कहा, “अगर हम सिर्फ आज की मांग को ध्यान में रखकर निर्माण करेंगे, तो भारत हमेशा भविष्य के मौकों का फायदा उठाने में पीछे रह जाएगा।”

गौतम अदाणी ने कहा कि आज गुजरात का मुंद्रा पोर्ट भारत का सबसे बड़ा पोर्ट है, लेकिन तीन दशक पहले पारंपरिक रेटिंग के हिसाब से इसे बिना किसी इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम वाला दलदली इलाका मानकर खारिज कर दिया जाता।

उन्होंने कहा, “आज मुंद्रा भारत के सबसे अहम कमर्शियल गेटवे में से एक है। लेकिन इससे भी अहम बात यह है कि मुंद्रा ने पोर्ट के आकार से कई गुना बड़ा इकोसिस्टम बनाया है। यह पोर्ट रेल से जुड़ा है। रेल लॉजिस्टिक्स सेंटर्स से जुड़ी है। लॉजिस्टिक्स पावर प्लांट्स से जुड़े हैं। पावर इंडस्ट्रियल जोन से जुड़ी है। इंडस्ट्रियल जोन पूरे भारत के ट्रेडर्स और मैन्युफैक्चरर्स से जुड़े हैं।”

इसी तरह, केरल में विझिंजम पोर्ट प्रोजेक्ट में 25 साल तक किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई, क्योंकि इसे बहुत मुश्किल और इसमें पूंजी का जोखिम “बहुत अधिक” माना जाता था, जबकि देश में ऐसे गहरे पानी वाले पोर्ट की बहुत जरूरत थी। फिर भी, अदाणी ग्रुप ने आगे बढ़कर इसे बनाया।

उन्होंने समझाया, “हम दुनिया के सबसे व्यस्त शिपिंग रूट से सिर्फ 10 नॉटिकल मील दूर थे, फिर भी हम अपना कंटेनर कार्गो नहीं संभाल पाते थे। हमें सिंगापुर, दुबई और कोलंबो के जरिए ट्रांसशिपमेंट करना पड़ता था। दशकों तक, भारतीय व्यापार को विदेशी पोर्ट्स को सीधा संप्रभुता टैक्स देना पड़ा, क्योंकि घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर को संस्थागत पूंजी के लिए बहुत जोखिम भरा माना जाता था।”

गौतम अदाणी ने कहा कि पारंपरिक नजरिए से देखें तो खावड़ा प्रोजेक्ट भी एक कठोर रेगिस्तान जैसा लगता है, जिसमें काम पूरा करने का जोखिम और अनिश्चित मांग जैसी चुनौतियां हैं।

उन्होंने कहा, “लेकिन जो बात छूट जाती है, वह यह है कि खावड़ा सिर्फ एक रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट नहीं है। खावड़ा एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक क्षमता अभूतपूर्व स्तर पर एक साथ आते हैं।”

यह भारत के भविष्य के कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने के लिए जरूरी क्लीन इलेक्ट्रॉन दे सकता है। यह भारत के एआई मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम की नींव है। यह उस नींव का हिस्सा बन सकता है जिस पर भारत की एआई अर्थव्यवस्था खड़ी होगी।

उन्होंने कहा कि पहले भारत की इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी महत्वाकांक्षाएं सीमित संसाधनों, सीमित क्षमता और सीमित आत्मविश्वास के कारण सीमित थीं। हालांकि, आज भारत के पास संसाधन हैं और उसने अपनी क्षमता साबित कर दी है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उसने अपनी क्षमता पर भरोसा करना सीख लिया है, जो आखिरकार किसी देश का भविष्य बदल देता है।

गौतम अदाणी ने कहा कि देश की सड़कें, पोर्ट और एयरपोर्ट अभूतपूर्व गति से बढ़ रहे हैं। रिन्यूएबल एनर्जी की क्षमता दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में तेजी से बढ़ रही थी और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर करोड़ों लोगों तक पहुंच रहा है।