नई दिल्ली, 1 सितंबर (आईएएनएस)। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ के 7.8 फीसदी पहुंचने के बाद देश में सियासी और आर्थिक बहस तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस आंकड़े को पीएम मोदी के नेतृत्व में मजबूत मैक्रो-इकोनॉमिक फंडामेंटल्स का सबूत बताते हुए राहुल गांधी के ‘डेड इकोनॉमी’ वाले बयान पर माफी की मांग की है। वहीं, कांग्रेस ने ग्रोथ का स्वागत करते हुए सवाल उठाया है कि इस रफ्तार का फायदा महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे आम आदमी तक कब पहुंचेगा?
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, “राहुल गांधी ने भारत की अर्थव्यवस्था को डेड इकोनॉमी कहा था। आज, देश की अर्थव्यवस्था 7.8 फीसदी की दर से बढ़ रही है। इससे साबित होता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत के मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल्स न केवल मजबूत हैं, बल्कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी एक चमकता हुआ स्पॉट है। आज, राहुल गांधी को देश से माफी मांगनी चाहिए।”
वहीं, शिवसेना सांसद मिलिंद देवड़ा ने कहा, “सबसे पहले मैं प्रधानमंत्री के बयान का तहे दिल से स्वागत करना चाहूंगा। यह बिल्कुल सही है कि आज दुनिया में जो हालात हैं, ईरान से लेकर रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध और मिडिल ईस्ट और पश्चिम एशिया में चल रहे झगड़े, कच्चे तेल की कीमतों पर बहुत दबाव डाल रहे हैं। सब जानते हैं कि भारत अपने कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा ईरान और दूसरे देशों से इंपोर्ट करता है।”
उन्होंने कहा कि इन हालात के बावजूद, भारत की इकोनॉमी मजबूत है। भारत आज दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी में से एक है और तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने की ओर बढ़ रहा है। मैं खासतौर पर प्रधानमंत्री को धन्यवाद देना चाहूंगा।
कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने कहा, “हम ग्रोथ रेट का स्वागत करते हैं, लेकिन सरकार को यह बताना चाहिए कि इस ग्रोथ रेट से समाज के सबसे निचले पायदान पर बैठे व्यक्ति और मिडिल क्लास को क्या फायदा होगा। क्या इससे बेरोजगारी कम होगी? क्या इसका महंगाई पर कोई असर पड़ेगा, जो अपने पीक पर है? या आप आंकड़े इस तरह से पेश कर रहे हैं कि वे बहुत अच्छे लगें, लेकिन इन आंकड़ों का जमीनी स्तर पर क्या फायदा है? आम आदमी महंगाई के बोझ तले परेशान है, बेरोजगारों को नौकरी नहीं मिल रही है, और लोग परेशान हैं।”
डब्ल्यूटीसी के चेयरमैन विजय कलंत्री ने कहा, “हम पहले से ही कह रहे हैं कि भारत 2030 से पहले 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। 2030 तक, हम दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएंगे। 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य है, जब भारत का लक्ष्य एक विकसित भारत बनना है, मुझे लगता है कि हम उस टारगेट को पार कर लेंगे, और यह 40 ट्रिलियन डॉलर तक भी पहुंच सकता है।”
उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने जिस डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया है, उससे हमें भी फायदा हुआ है। आप देख सकते हैं कि जीएसटी कलेक्शन हर बार 7-8 फीसदी, यहां तक कि 10 फीसदी तक बढ़ रहा है। मुझे लगता है कि अगर थोड़ा और रेशनलाइजेशन किया जाए, खासकर जहां रेट ज्यादा हैं, तो कलेक्शन और बढ़ेगा। हम अक्सर कहते हैं कि कुछ ही लोग इनकम टैक्स देते हैं, लेकिन जैसे-जैसे जीएसटी बढ़ रहा है, हर व्यक्ति टैक्स सिस्टम में योगदान दे रहा है।”
वित्तीय विशेषज्ञ अजय रोटी ने कहा, “मुझे आज इसके बने रहने पर पहले से कहीं ज्यादा भरोसा है, क्योंकि जैसा कि मैंने शुरू में कहा था, ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन में 11.9 फीसदी की बढ़ोतरी, जो दिखाती है कि प्राइवेट कैपएक्स शायद शुरू हो रहा है, तो इससे इसके बने रहने की संभावना बहुत बेहतर हो जाती है। मुझे लगता है कि एक तो इसे बनाए रखना है और दूसरा इन नंबरों को लेकर ज्यादा खुश नहीं होना है। मुझे काफी भरोसा है कि हम इस रफ्तार को बनाए रख सकते हैं, हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स को देखते हुए, टैक्स कलेक्शन, जीएसटी कलेक्शन रिकॉर्ड के बाद रिकॉर्ड बना रहे हैं। तो, कई पहलू, वहां की जियोपॉलिटिकल स्थिति, ग्लोबल अर्थव्यवस्था, तेल की कीमतें, ये ऐसी चीजें हैं, जिनसे हमें सावधान रहना होगा, नजर रखनी होगी। मुझे लगता है कि हमें इस रफ्तार को बनाए रखने में सक्षम होना चाहिए।”
